MPPSC प्रारंभिक परीक्षा : भारत एवं मध्य प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था (Polity & Governance)
विगत 6 वर्षों (2020 से 2025) के प्रारंभिक परीक्षा पेपर-1 में पूछे गए भारतीय संविधान, शासन प्रणाली एवं मध्य प्रदेश की संवैधानिक व्यवस्था के सभी 111 प्रश्नों का प्रामाणिक उत्तर कुंजी, 4 विकल्पों और उच्च स्तरीय व्याख्या सहित संकलन।
MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2025 : संवैधानिक व्यवस्था कुल 12 प्रश्न
विषय 5: Constitutional System of India and MP | प्रश्न क्रमांक 1 से 12प्रश्न 1. राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के अनुसार कितने राज्य और केन्द्र-शासित प्रदेश बनाए गए थे ?
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सही उत्तर : (D) 14 राज्य और 6 केन्द्र-शासित प्रदेश
विस्तृत व्याख्या :
फ़ज़ल अली की अध्यक्षता वाले राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) की सिफारिशों पर संसद द्वारा पारित ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956’ और 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 के द्वारा भारत के राज्यों के पूर्ववर्ती वर्गीकरण (भाग क, ख, ग, घ) को समाप्त कर 1 नवंबर 1956 को 14 राज्य और 6 केन्द्र-शासित प्रदेश (संघ राज्य क्षेत्र) बनाए गए थे। इसी पुनर्गठन के तहत 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना हुई थी।
फ़ज़ल अली की अध्यक्षता वाले राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) की सिफारिशों पर संसद द्वारा पारित ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956’ और 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 के द्वारा भारत के राज्यों के पूर्ववर्ती वर्गीकरण (भाग क, ख, ग, घ) को समाप्त कर 1 नवंबर 1956 को 14 राज्य और 6 केन्द्र-शासित प्रदेश (संघ राज्य क्षेत्र) बनाए गए थे। इसी पुनर्गठन के तहत 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश राज्य की स्थापना हुई थी।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- 14 राज्य: आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, बंबई, जम्मू और कश्मीर, केरल, मध्य प्रदेश, मद्रास, मैसूर, उड़ीसा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।
- 6 केन्द्र-शासित प्रदेश: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, लक्कादीव-मिनिकॉय-अमीनदीवी द्वीप, मणिपुर और त्रिपुरा।
- राज्य पुनर्गठन आयोग (1953): अध्यक्ष – फजल अली; सदस्य – के.एम. पणिक्कर और हृदयनाथ कुंजरू।
प्रश्न 2. भारत में किसी राज्य को विशेष दर्जा देने के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा पैरामीटर सामान्यतः स्वीकार नहीं किया जाता है ?
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सही उत्तर : (C) अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की बड़ी आबादी
विस्तृत व्याख्या :
राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) द्वारा गाडगिल फॉर्मूले के तहत किसी राज्य को ‘विशेष श्रेणी का दर्जा’ (Special Category Status – SCS) देने के लिए 5 मुख्य मानक निर्धारित किए गए हैं:
1. पहाड़ी और दुर्गम भूभाग (Hilly and difficult terrain)
2. कम जनसंख्या घनत्व और/या जनजातीय (ST) आबादी का बड़ा हिस्सा (केवल Tribal population, न कि अनुसूचित जाति SC)
3. पड़ोसी देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर रणनीतिक अवस्थिति
4. आर्थिक और ढांचागत पिछड़ापन
5. राज्य के वित्त की अव्यवहार्य प्रकृति।
अतः ‘अनुसूचित जाति (SC) की बड़ी आबादी’ इसका स्वीकृत पैरामीटर नहीं है।
राष्ट्रीय विकास परिषद (NDC) द्वारा गाडगिल फॉर्मूले के तहत किसी राज्य को ‘विशेष श्रेणी का दर्जा’ (Special Category Status – SCS) देने के लिए 5 मुख्य मानक निर्धारित किए गए हैं:
1. पहाड़ी और दुर्गम भूभाग (Hilly and difficult terrain)
2. कम जनसंख्या घनत्व और/या जनजातीय (ST) आबादी का बड़ा हिस्सा (केवल Tribal population, न कि अनुसूचित जाति SC)
3. पड़ोसी देशों के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं पर रणनीतिक अवस्थिति
4. आर्थिक और ढांचागत पिछड़ापन
5. राज्य के वित्त की अव्यवहार्य प्रकृति।
अतः ‘अनुसूचित जाति (SC) की बड़ी आबादी’ इसका स्वीकृत पैरामीटर नहीं है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- विशेष दर्जा प्राप्त प्रथम राज्य (1969): असम, नगालैंड और जम्मू-कश्मीर।
- गाडगिल-मुखर्जी फॉर्मूला: इसके आधार पर केंद्र प्रायोजित योजनाओं में 90% अनुदान (Grant) और 10% ऋण (Loan) दिया जाता था।
- 14वें वित्त आयोग: 14वें वित्त आयोग ने पूर्वोत्तर राज्यों और 3 हिमालयी राज्यों को छोड़कर शेष राज्यों के लिए विशेष श्रेणी दर्जे की अवधारणा को समाप्त करने की सिफारिश की।
प्रश्न 3. 18वीं लोकसभा के स्पीकर द्वारा वर्ष 2024-25 के लिए गठित संसदीय समितियों के अध्यक्षों की नियुक्ति के संबंध में कौन-सा युग्म ग़लत है ?
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सही उत्तर : (B) प्राक्कलन समिति – बैजयंत पाण्डा
विस्तृत व्याख्या :
18वीं लोकसभा (2024-25) के लिए प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) के अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ भाजपा सांसद ‘संजय जायसवाल’ को नियुक्त किया गया है (बैजयंत पाण्डा नहीं)। लोक लेखा समिति (PAC) के अध्यक्ष कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल, SC/ST कल्याण समिति के अध्यक्ष फग्गन सिंह कुलस्ते तथा OBC कल्याण समिति के अध्यक्ष गणेश सिंह (सतना, MP सांसद) नियुक्त किए गए हैं।
18वीं लोकसभा (2024-25) के लिए प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) के अध्यक्ष के रूप में वरिष्ठ भाजपा सांसद ‘संजय जायसवाल’ को नियुक्त किया गया है (बैजयंत पाण्डा नहीं)। लोक लेखा समिति (PAC) के अध्यक्ष कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल, SC/ST कल्याण समिति के अध्यक्ष फग्गन सिंह कुलस्ते तथा OBC कल्याण समिति के अध्यक्ष गणेश सिंह (सतना, MP सांसद) नियुक्त किए गए हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्राक्कलन समिति (Estimates Committee): संसद की सबसे बड़ी समिति (कुल 30 सदस्य – सभी केवल लोकसभा से)। इसका अध्यक्ष सत्ताधारी दल से ही होता है।
- लोक लेखा समिति (PAC): कुल 22 सदस्य (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)। परंपरा के अनुसार इसका अध्यक्ष विपक्षी दल से होता है। इसे प्राक्कलन समिति की ‘जुड़वां बहन’ कहते हैं।
- सरकारी उपक्रम समिति (COPU): कुल 22 सदस्य (15 लोकसभा + 7 राज्यसभा)।
प्रश्न 4. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के अंतर्गत निम्नलिखित में से किस आयोग के गठन की बात कही गई है ?
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सही उत्तर : (D) राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ (National Commission for Scheduled Castes – NCSC) के गठन का संवैधानिक प्रावधान है। 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा पूर्ववर्ती संयुक्त आयोग को विभाजित कर अनुच्छेद 338 में NCSC तथा नए अनुच्छेद 338A (338-क) में NCST का गठन किया गया।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ (National Commission for Scheduled Castes – NCSC) के गठन का संवैधानिक प्रावधान है। 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा पूर्ववर्ती संयुक्त आयोग को विभाजित कर अनुच्छेद 338 में NCSC तथा नए अनुच्छेद 338A (338-क) में NCST का गठन किया गया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 338: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)।
- अनुच्छेद 338A: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST – 89वां संशोधन 2003)।
- अनुच्छेद 338B: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC – 102वां संशोधन 2018 द्वारा संवैधानिक दर्जा)।
- संवैधानिक स्थिति: NCSC, NCST और NCBC तीनों संवैधानिक निकाय हैं, जबकि महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग व मानवाधिकार आयोग सांविधिक (Statutory) निकाय हैं।
प्रश्न 5. 30.04.1977 से 23.06.1977 के दौरान, जब मध्यप्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया, तब मध्यप्रदेश के राज्यपाल ________ थे।
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सही उत्तर : (B) श्री सत्य नारायण सिन्हा
विस्तृत व्याख्या :
मध्यप्रदेश में पहली बार राष्ट्रपति शासन 30 अप्रैल 1977 से 23 जून 1977 तक लागू किया गया था। इस अवधि के दौरान मध्य प्रदेश के राज्यपाल ‘श्री सत्य नारायण सिन्हा’ थे (जिन्होंने 8 मार्च 1971 से 13 अक्टूबर 1977 तक राज्यपाल के रूप में कार्य किया)। इस समय मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल थे।
मध्यप्रदेश में पहली बार राष्ट्रपति शासन 30 अप्रैल 1977 से 23 जून 1977 तक लागू किया गया था। इस अवधि के दौरान मध्य प्रदेश के राज्यपाल ‘श्री सत्य नारायण सिन्हा’ थे (जिन्होंने 8 मार्च 1971 से 13 अक्टूबर 1977 तक राज्यपाल के रूप में कार्य किया)। इस समय मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल थे।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रथम राष्ट्रपति शासन (1977): राज्यपाल – सत्य नारायण सिन्हा; मुख्यमंत्री – श्यामाचरण शुक्ल।
- द्वितीय राष्ट्रपति शासन (1980): राज्यपाल – सी.एम. पुनाचा; मुख्यमंत्री – सुंदरलाल पटवा।
- तृतीय राष्ट्रपति शासन (1992-1993): राज्यपाल – कुंवर महमूद अली खान; मुख्यमंत्री – सुंदरलाल पटवा।
- कुल राष्ट्रपति शासन: मध्य प्रदेश में अब तक कुल 3 बार (1977, 1980, 1992) राष्ट्रपति शासन लगा है।
प्रश्न 6. मध्यप्रदेश के निम्नलिखित राज्यपालों में से किसका कार्यकाल सबसे छोटा रहा ?
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सही उत्तर : (A) पट्टाभि सीतारमैया
विस्तृत व्याख्या :
दिए गए राज्यपालों में मध्य प्रदेश के प्रथम राज्यपाल ‘डॉ. बी. पट्टाभि सीतारमैया’ का कार्यकाल सबसे छोटा रहा। वे 1 नवंबर 1956 से 13 जून 1957 तक (मात्र लगभग 7 माह और 13 दिन) मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे। जबकि हरि विनायक पाटस्कर का कार्यकाल मध्य प्रदेश के इतिहास में पूर्णकालिक राज्यपालों में सबसे लंबा (लगभग 7 वर्ष 7 माह) रहा।
दिए गए राज्यपालों में मध्य प्रदेश के प्रथम राज्यपाल ‘डॉ. बी. पट्टाभि सीतारमैया’ का कार्यकाल सबसे छोटा रहा। वे 1 नवंबर 1956 से 13 जून 1957 तक (मात्र लगभग 7 माह और 13 दिन) मध्य प्रदेश के राज्यपाल रहे। जबकि हरि विनायक पाटस्कर का कार्यकाल मध्य प्रदेश के इतिहास में पूर्णकालिक राज्यपालों में सबसे लंबा (लगभग 7 वर्ष 7 माह) रहा।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- डॉ. पट्टाभि सीतारमैया: मध्य प्रदेश के पहले राज्यपाल (1956-1957)। कांग्रेस का इतिहास नामक विख्यात पुस्तक के लेखक।
- हरि विनायक पाटस्कर: मध्य प्रदेश में सर्वाधिक लंबे समय तक (1957 से 1965 तक) राज्यपाल रहे।
- पी.वी. दीक्षित: मध्य प्रदेश के प्रथम कार्यवाहक (Acting) राज्यपाल थे।
प्रश्न 7. भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग निम्नलिखित में से किस आधार पर लगाया जा सकता है ?
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सही उत्तर : (B) संविधान का उल्लंघन
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61(1) के अनुसार, राष्ट्रपति पर केवल और केवल ‘संविधान का अतिक्रमण / उल्लंघन’ (Violation of the Constitution) के आधार पर ही महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया चलाई जा सकती है। संविधान में इस आधार के अतिरिक्त किसी अन्य आधार का उल्लेख नहीं किया गया है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 61(1) के अनुसार, राष्ट्रपति पर केवल और केवल ‘संविधान का अतिक्रमण / उल्लंघन’ (Violation of the Constitution) के आधार पर ही महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया चलाई जा सकती है। संविधान में इस आधार के अतिरिक्त किसी अन्य आधार का उल्लेख नहीं किया गया है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया। यह एक अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) प्रक्रिया है।
- प्रक्रिया की शर्तें: आरोप संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है। सदन के 1/4 सदस्यों के हस्ताक्षर और 14 दिन पूर्व लिखित नोटिस अनिवार्य है।
- पारित होने का बहुमत: दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई (2/3) विशेष बहुमत से पारित होना अनिवार्य है।
- अब तक: भारत के इतिहास में अब तक किसी भी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चलाया गया है।
प्रश्न 8. किस संविधान संशोधन के द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को मौलिक (मूल) अधिकार बनाया गया ?
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सही उत्तर : (C) 86वें संविधान संशोधन द्वारा
विस्तृत व्याख्या :
86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21A (21-क) जोड़ा गया, जिसने 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया। इसी संशोधन द्वारा अनुच्छेद 45 में बदलाव किया गया तथा अनुच्छेद 51A में 11वां मौलिक कर्तव्य (माता-पिता का कर्तव्य) जोड़ा गया।
86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21A (21-क) जोड़ा गया, जिसने 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया। इसी संशोधन द्वारा अनुच्छेद 45 में बदलाव किया गया तथा अनुच्छेद 51A में 11वां मौलिक कर्तव्य (माता-पिता का कर्तव्य) जोड़ा गया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- RTE अधिनियम 2009: शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 में संसद द्वारा पारित हुआ और 1 अप्रैल 2010 से पूरे देश में लागू हुआ।
- संविधान के 3 भागों में प्रभाव: भाग 3 (अनुच्छेद 21A – मौलिक अधिकार), भाग 4 (अनुच्छेद 45 – DPSP), और भाग 4A (अनुच्छेद 51A(k) – 11वां मौलिक कर्तव्य)।
- मोहिनी जैन एवं उन्नीकृष्णन वाद: इन ऐतिहासिक मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का अभिन्न अंग माना था।
प्रश्न 9. कथन I : संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को नई दिल्ली में हुई थी।
कथन II : जवाहरलाल नेहरू को संविधान सभा में आमंत्रित नहीं किया गया था।
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है ?
कथन II : जवाहरलाल नेहरू को संविधान सभा में आमंत्रित नहीं किया गया था।
निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है ?
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सही उत्तर : (C) कथन I सही है, लेकिन कथन II ग़लत है।
विस्तृत व्याख्या :
कथन I पूर्णतः सही है क्योंकि संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली के काउंसिल चैंबर के पुस्तकालय भवन (वर्तमान सेंट्रल हॉल) में आयोजित हुई थी, जिसमें डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष बने थे। कथन II बिल्कुल असत्य है क्योंकि पं. जवाहरलाल नेहरू संविधान सभा के प्रमुख निर्वाचित सदस्य थे और उन्होंने ही 13 दिसंबर 1946 को ऐतिहासिक ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया था। अतः विकल्प (C) सही है।
कथन I पूर्णतः सही है क्योंकि संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली के काउंसिल चैंबर के पुस्तकालय भवन (वर्तमान सेंट्रल हॉल) में आयोजित हुई थी, जिसमें डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा अस्थायी अध्यक्ष बने थे। कथन II बिल्कुल असत्य है क्योंकि पं. जवाहरलाल नेहरू संविधान सभा के प्रमुख निर्वाचित सदस्य थे और उन्होंने ही 13 दिसंबर 1946 को ऐतिहासिक ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ प्रस्तुत किया था। अतः विकल्प (C) सही है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- पहली बैठक: 9 दिसंबर 1946 (कुल 207 सदस्यों ने भाग लिया, मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया)।
- अस्थायी अध्यक्ष: डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा (फ्रांसीसी परंपरा के अनुसार वरिष्ठतम सदस्य)।
- स्थायी अध्यक्ष: 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष और एच.सी. मुखर्जी उपाध्यक्ष चुने गए।
- उद्देश्य प्रस्ताव: 13 दिसंबर 1946 को पं. नेहरू द्वारा पेश, जिसे 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
प्रश्न 10. भारतीय संविधान के संदर्भ में ‘आधारभूत ढाँचा’ सिद्धांत का प्रतिपादन सर्वप्रथम निम्नलिखित में से किस मामले में किया गया था ?
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सही उत्तर : (D) केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य
विस्तृत व्याख्या :
सर्वोच्च न्यायालय ने ‘केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य (1973)’ के ऐतिहासिक मामले में अब तक की सबसे बड़ी 13 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ (7:6 के बहुमत) द्वारा ‘मूल संरचना’ / ‘आधारभूत ढाँचा सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) का प्रतिपादन किया। अदालत ने निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, परंतु वह संविधान के आधारभूत ढांचे को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती।
सर्वोच्च न्यायालय ने ‘केशवानन्द भारती बनाम केरल राज्य (1973)’ के ऐतिहासिक मामले में अब तक की सबसे बड़ी 13 न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ (7:6 के बहुमत) द्वारा ‘मूल संरचना’ / ‘आधारभूत ढाँचा सिद्धांत’ (Basic Structure Doctrine) का प्रतिपादन किया। अदालत ने निर्णय दिया कि संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, परंतु वह संविधान के आधारभूत ढांचे को नष्ट या परिवर्तित नहीं कर सकती।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- फैसले की तारीख: 24 अप्रैल 1973 (मुख्य न्यायाधीश एस.एम. सीकरी की अध्यक्षता वाली पीठ)।
- आधारभूत ढांचे के तत्व: संविधान की सर्वोच्चता, विधि का शासन, शक्तियों का पृथक्करण, न्यायिक समीक्षा, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र आदि।
- मिनर्वा मिल्स वाद (1980): आधारभूत ढांचे के सिद्धांत की पुनः पुष्टि की गई और न्यायिक समीक्षा को इसका अनिवार्य अंग घोषित किया गया।
प्रश्न 11. उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रावधानों को भारतीय संविधान में ________ कमेटी (1945) की प्रकाशित अनुशंसाओं को ध्यान में रखते हुए समाविष्ट किया गया था।
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सही उत्तर : (D) सप्रू (सर तेज बहादुर सप्रू)
विस्तृत व्याख्या :
वर्ष 1945 में गठित ‘सप्रू कमेटी’ (सर तेज बहादुर सप्रू समिति – Sapru Committee) ने संवैधानिक सुधारों और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर एक ऐतिहासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस समिति ने स्पष्ट सिफारिश की थी कि उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका का पूर्ण नियंत्रण नहीं होना चाहिए और इसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से अनिवार्य परामर्श का प्रावधान होना चाहिए। संविधान सभा ने इन प्रावधानों को प्रारूप में शामिल करते हुए सप्रू समिति की अनुशंसाओं को मुख्य आधार बनाया।
वर्ष 1945 में गठित ‘सप्रू कमेटी’ (सर तेज बहादुर सप्रू समिति – Sapru Committee) ने संवैधानिक सुधारों और न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर एक ऐतिहासिक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इस समिति ने स्पष्ट सिफारिश की थी कि उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका का पूर्ण नियंत्रण नहीं होना चाहिए और इसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश से अनिवार्य परामर्श का प्रावधान होना चाहिए। संविधान सभा ने इन प्रावधानों को प्रारूप में शामिल करते हुए सप्रू समिति की अनुशंसाओं को मुख्य आधार बनाया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- सर तेज बहादुर सप्रू: भारत के प्रख्यात विधिवेत्ता, उदारवादी नेता और गोलमेज सम्मेलनों के प्रमुख वार्ताकार थे।
- सप्रू समिति (1944-45): गैर-दलीय सम्मेलन द्वारा गठित, जिसने अल्पसंख्यकों के अधिकारों और न्यायपालिका की स्वायत्तता पर बल दिया।
- न्यायाधीशों की नियुक्ति: संविधान के अनुच्छेद 124(2) में उच्चतम न्यायालय और अनुच्छेद 217(1) में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान है।
प्रश्न 12. वर्तमान समय में भारतीय संविधान में संपत्ति के अधिकार को निम्नलिखित में से किस रूप में स्वीकार किया गया है ?
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सही उत्तर : (D) कानूनी अधिकार
विस्तृत व्याख्या :
मूल संविधान में संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(f) तथा अनुच्छेद 31 के तहत एक मौलिक अधिकार था। परंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इसे मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर संविधान के भाग 12 में ‘अनुच्छेद 300A’ (300-क) के अंतर्गत केवल एक ‘कानूनी / विधिक अधिकार’ (Legal/Constitutional Right) बना दिया गया है।
मूल संविधान में संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 19(1)(f) तथा अनुच्छेद 31 के तहत एक मौलिक अधिकार था। परंतु 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इसे मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर संविधान के भाग 12 में ‘अनुच्छेद 300A’ (300-क) के अंतर्गत केवल एक ‘कानूनी / विधिक अधिकार’ (Legal/Constitutional Right) बना दिया गया है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 300A: ‘विधि के प्राधिकार के बिना किसी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।’ (कानूनी अधिकार)।
- 44वां संशोधन 1978: मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार द्वारा पारित किया गया।
- वर्तमान मौलिक अधिकार: प्रारंभ में 7 मौलिक अधिकार थे, संपत्ति का अधिकार हटने के बाद अब कुल 6 मौलिक अधिकार हैं।
MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2024 : संवैधानिक व्यवस्था कुल 10 प्रश्न
विषय 5: Constitutional System of India and MP | प्रश्न क्रमांक 1 से 10प्रश्न 1. निम्नलिखित में से किस मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों में संघर्ष की स्थिति में राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों पर मौलिक अधिकारों की व्यापकता की घोषणा की ?
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सही उत्तर : (B) मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराईराजन (1951)
विस्तृत व्याख्या :
‘मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराईराजन (1951)’ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह ऐतिहासिक व्यवस्था दी कि मौलिक अधिकार (भाग III) और नीति निदेशक तत्व (भाग IV) के बीच टकराव की स्थिति में मौलिक अधिकार प्रभावी और व्यापक होंगे, तथा निदेशक तत्व मौलिक अधिकारों के अधीनस्थ (Subsidiary) रहेंगे। इसी निर्णय के बाद संसद ने प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 पारित किया था।
‘मद्रास राज्य बनाम चंपकम दोराईराजन (1951)’ मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह ऐतिहासिक व्यवस्था दी कि मौलिक अधिकार (भाग III) और नीति निदेशक तत्व (भाग IV) के बीच टकराव की स्थिति में मौलिक अधिकार प्रभावी और व्यापक होंगे, तथा निदेशक तत्व मौलिक अधिकारों के अधीनस्थ (Subsidiary) रहेंगे। इसी निर्णय के बाद संसद ने प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम, 1951 पारित किया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- चंपकम दोराईराजन वाद (1951): मेडिकल कॉलेज में सांप्रदायिक आरक्षण को चुनौती दी गई थी; सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 15 और 29 के उल्लंघन पर इसे रद्द किया।
- प्रथम संशोधन (1951): सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की उन्नति हेतु अनुच्छेद 15(4) जोड़ा गया।
- मिनर्वा मिल्स वाद (1980): सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान भाग III और भाग IV के बीच संतुलन के आधार पर टिका हुआ है।
प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
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सही उत्तर : (A) मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की स्थिति में, मामले का निर्णय विधि आयोग द्वारा किया जाता है।
विस्तृत व्याख्या :
कथन (A) गलत है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (ECs) के बीच मतभेद की स्थिति में निर्णय ‘बहुमत’ (Majority) के आधार पर आयोग द्वारा स्वयं किया जाता है, न कि विधि आयोग द्वारा। शेष तीनों कथन (B, C, D) निर्वाचन आयोग अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं।
कथन (A) गलत है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्तों (ECs) के बीच मतभेद की स्थिति में निर्णय ‘बहुमत’ (Majority) के आधार पर आयोग द्वारा स्वयं किया जाता है, न कि विधि आयोग द्वारा। शेष तीनों कथन (B, C, D) निर्वाचन आयोग अधिनियम और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- शक्तियां एवं वेतन: CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समकक्ष वेतन, भत्ते और शक्तियां प्राप्त हैं।
- हटाने की प्रक्रिया: CEC को केवल महाभियोग जैसी प्रक्रिया (SC जज के समान) से हटाया जा सकता है, जबकि अन्य ECs को CEC की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा हटाया जाता है।
- कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)।
प्रश्न 3. संविधान में संशोधन के लिए कम-से-कम आधे राज्यों के विधान मंडलों द्वारा अनुसमर्थन की आवश्यकता होगी :
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सही उत्तर : (D) यदि ऐसा संशोधन अनुच्छेद 279-क में कोई परिवर्तन करना चाहता है।
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368(2) के परंतुक के अनुसार, संघीय ढांचे को प्रभावित करने वाले अनुच्छेदों (जैसे राष्ट्रपति चुनाव, संघ-राज्य विधायी संबंध, सातवीं अनुसूची, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व, तथा वस्तु एवं सेवा कर परिषद – GST Council से संबंधित अनुच्छेद 279A) में संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ ‘कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन’ की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368(2) के परंतुक के अनुसार, संघीय ढांचे को प्रभावित करने वाले अनुच्छेदों (जैसे राष्ट्रपति चुनाव, संघ-राज्य विधायी संबंध, सातवीं अनुसूची, संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व, तथा वस्तु एवं सेवा कर परिषद – GST Council से संबंधित अनुच्छेद 279A) में संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ-साथ ‘कम-से-कम आधे राज्यों के विधानमंडलों के अनुसमर्थन’ की अनिवार्य आवश्यकता होती है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 279A: 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा जोड़ा गया जीएसटी परिषद का प्रावधान है।
- संघीय प्रावधान (अनुच्छेद 368 परंतुक): राष्ट्रपति निर्वाचन (अनु. 54 व 55), संघ व राज्य कार्यपालिका शक्ति विस्तार (अनु. 73 व 162), न्यायपालिका (भाग 5 अध्याय 4, भाग 6 अध्याय 5), सातवीं अनुसूची, स्वयं अनु. 368।
- 101वां संशोधन: आधे से अधिक राज्यों (असम पहला राज्य था) द्वारा अनुसमर्थित किया गया था।
प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग के बारे में बताता है ?
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सही उत्तर : (C) अनुच्छेद 61
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 61’ राष्ट्रपति पर महाभियोग (Procedure for Impeachment of the President) चलाने की विस्तृत प्रक्रिया का वर्णन करता है। महाभियोग केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर लगाया जा सकता है और यह संसद के किसी भी सदन में शुरू हो सकता है।
भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 61’ राष्ट्रपति पर महाभियोग (Procedure for Impeachment of the President) चलाने की विस्तृत प्रक्रिया का वर्णन करता है। महाभियोग केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर लगाया जा सकता है और यह संसद के किसी भी सदन में शुरू हो सकता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 60: राष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान (CJI द्वारा दिलाई जाती है)।
- अनुच्छेद 61: राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया।
- अनुच्छेद 62: राष्ट्रपति पद की रिक्ति को भरने के लिए चुनाव कराने का समय।
- अनुच्छेद 63: भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
प्रश्न 5. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 76 के अनुसार, राष्ट्रपति उस व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी (अटॉर्नी जनरल) नियुक्त करेगा :
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सही उत्तर : (C) जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य है।
विस्तृत व्याख्या :
संविधान के अनुच्छेद 76(1) के अनुसार, राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखने वाले किसी व्यक्ति को ‘भारत का महान्यायवादी’ (Attorney General for India) नियुक्त करेगा। वह भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
संविधान के अनुच्छेद 76(1) के अनुसार, राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखने वाले किसी व्यक्ति को ‘भारत का महान्यायवादी’ (Attorney General for India) नियुक्त करेगा। वह भारत सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है और राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- संसद में अधिकार (अनुच्छेद 88): महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, परंतु मतदान (Vote) करने का अधिकार नहीं है।
- प्रथम महान्यायवादी: एम.सी. सीतलवाड़ (सर्वाधिक लंबे समय तक रहे)।
- महाधिवक्ता (Advocate General): अनुच्छेद 165 के तहत राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी, जिसकी योग्यता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश बनने की होती है।
प्रश्न 6. के.एम. मुंशी ________ से संबंधित थे।
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सही उत्तर : (B) संविधान प्रारूप समिति
विस्तृत व्याख्या :
डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (के.एम. मुंशी) 29 अगस्त 1947 को गठित संविधान सभा की 7 सदस्यीय ‘प्रारूप समिति’ (Drafting Committee) के प्रमुख सदस्य थे, जिसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर थे। के.एम. मुंशी ने ही प्रस्तावना को भारतीय संविधान की ‘राजनीतिक जन्मपत्री’ (Political Horoscope) कहा था।
डॉ. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी (के.एम. मुंशी) 29 अगस्त 1947 को गठित संविधान सभा की 7 सदस्यीय ‘प्रारूप समिति’ (Drafting Committee) के प्रमुख सदस्य थे, जिसके अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अम्बेडकर थे। के.एम. मुंशी ने ही प्रस्तावना को भारतीय संविधान की ‘राजनीतिक जन्मपत्री’ (Political Horoscope) कहा था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रारूप समिति के 7 सदस्य: 1. डॉ. बी.आर. अम्बेडकर (अध्यक्ष), 2. एन. गोपालस्वामी अय्यंगार, 3. अल्लादि कृष्णास्वामी अय्यर, 4. डॉ. के.एम. मुंशी, 5. सैयद मोहम्मद सादुल्लाह, 6. एन. माधव राव (बी.एल. मित्र के स्थान पर), 7. टी.टी. कृष्णामाचारी (डी.पी. खेतान की मृत्यु के बाद)।
- वन महोत्सव: के.एम. मुंशी ने 1950 में भारत में ‘वन महोत्सव’ का शुभारंभ किया था।
प्रश्न 7. भारत के राष्ट्रपति किसकी सलाह पर अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं ?
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सही उत्तर : (C) संघ मंत्रिमंडल
विस्तृत व्याख्या :
44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात अनुच्छेद 352(3) में यह अनिवार्य प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा तभी कर सकते हैं जब ‘संघ मंत्रिमंडल’ (Cabinet – प्रधानमंत्री और कैबिनेट स्तर के अन्य मंत्रियों) द्वारा उन्हें ऐसी घोषणा के लिए ‘लिखित सिफारिश’ (Written Recommendation) भेजी जाए। केवल प्रधानमंत्री की मौखिक सलाह पर आपातकाल नहीं लगाया जा सकता।
44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 के पश्चात अनुच्छेद 352(3) में यह अनिवार्य प्रावधान किया गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा तभी कर सकते हैं जब ‘संघ मंत्रिमंडल’ (Cabinet – प्रधानमंत्री और कैबिनेट स्तर के अन्य मंत्रियों) द्वारा उन्हें ऐसी घोषणा के लिए ‘लिखित सिफारिश’ (Written Recommendation) भेजी जाए। केवल प्रधानमंत्री की मौखिक सलाह पर आपातकाल नहीं लगाया जा सकता।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- संविधान में ‘मंत्रिमंडल’ (Cabinet) शब्द: पूरे संविधान में ‘मंत्रिमंडल’ शब्द का प्रयोग केवल एक बार अनुच्छेद 352(3) में हुआ है (44वें संशोधन द्वारा)।
- अनुच्छेद 352 के 3 आधार: युद्ध, बाह्य आक्रमण, अथवा ‘सशस्त्र विद्रोह’ (Internal Disturbance को हटाकर 44वें संशोधन द्वारा सशस्त्र विद्रोह किया गया)।
- अनुमोदन अवधि: उद्घोषणा के 1 माह के भीतर संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से अनुमोदित होना आवश्यक है।
प्रश्न 8. अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान ________ में है।
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सही उत्तर : (C) भोपाल
विस्तृत व्याख्या :
‘अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान’ (AIGGPA – Atal Bihari Vajpayee Institute of Good Governance and Policy Analysis) मध्य प्रदेश की राजधानी ‘भोपाल’ में स्थित है। यह मध्य प्रदेश शासन का एक शीर्ष स्वायत्त थिंक टैंक है जो सुशासन, सार्वजनिक नीति और प्रशासनिक सुधारों के मूल्यांकन एवं निर्माण का कार्य करता है।
‘अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान’ (AIGGPA – Atal Bihari Vajpayee Institute of Good Governance and Policy Analysis) मध्य प्रदेश की राजधानी ‘भोपाल’ में स्थित है। यह मध्य प्रदेश शासन का एक शीर्ष स्वायत्त थिंक टैंक है जो सुशासन, सार्वजनिक नीति और प्रशासनिक सुधारों के मूल्यांकन एवं निर्माण का कार्य करता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- स्थापना: वर्ष 2007 में स्कूल ऑफ गुड गवर्नेंस एंड पॉलिसी एनालिसिस के रूप में स्थापित, 2014 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर नामकरण हुआ।
- मुख्यालय: भोपाल (मध्य प्रदेश)।
- कार्य: राज्य में सुशासन सूचकांक तैयार करना, योजनाओं का प्रभाव मूल्यांकन करना और नीति निर्माण में तकनीकी सहयोग देना।
प्रश्न 9. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. कानूनी मामलों पर राज्य सरकार को सलाह देना महाधिवक्ता का कर्तव्य होगा।
2. महाधिवक्ता मंत्रिमंडल के प्रसादपर्यंत पद पर बने रहेंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
1. कानूनी मामलों पर राज्य सरकार को सलाह देना महाधिवक्ता का कर्तव्य होगा।
2. महाधिवक्ता मंत्रिमंडल के प्रसादपर्यंत पद पर बने रहेंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
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सही उत्तर : (A) केवल 1
विस्तृत व्याख्या :
कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 165(2) के अनुसार राज्य सरकार को कानूनी मामलों पर सलाह देना महाधिवक्ता (Advocate General) का प्राथमिक संवैधानिक कर्तव्य है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 165(3) के अनुसार महाधिवक्ता ‘राज्यपाल के प्रसादपर्यंत’ (Pleasure of the Governor) पद धारण करता है, मंत्रिमंडल के प्रसादपर्यंत नहीं। अतः केवल कथन 1 सही है।
कथन 1 सही है क्योंकि अनुच्छेद 165(2) के अनुसार राज्य सरकार को कानूनी मामलों पर सलाह देना महाधिवक्ता (Advocate General) का प्राथमिक संवैधानिक कर्तव्य है। कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 165(3) के अनुसार महाधिवक्ता ‘राज्यपाल के प्रसादपर्यंत’ (Pleasure of the Governor) पद धारण करता है, मंत्रिमंडल के प्रसादपर्यंत नहीं। अतः केवल कथन 1 सही है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 165: राज्य का महाधिवक्ता।
- योग्यता: उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य व्यक्ति।
- विधानसभा में अधिकार (अनुच्छेद 177): राज्य विधानमंडल में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार, परंतु मतदान का अधिकार नहीं।
- मध्य प्रदेश के प्रथम महाधिवक्ता: श्री एम. धर्माधिकारी।
प्रश्न 10. पंचायतों को सौंपी जा सकने वाली शक्तियों, अधिकार और जिम्मेदारियों की सूची ________ में दी गई है।
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सही उत्तर : (A) ग्यारहवीं अनुसूची
विस्तृत व्याख्या :
73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में ‘ग्यारहवीं अनुसूची’ (Eleventh Schedule) और अनुच्छेद 243G (243-छ) जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों को सौंपे जाने वाले कुल 29 कार्यात्मक विषयों (Functional Subjects) की सूची दी गई है।
73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में ‘ग्यारहवीं अनुसूची’ (Eleventh Schedule) और अनुच्छेद 243G (243-छ) जोड़ी गई, जिसमें पंचायतों को सौंपे जाने वाले कुल 29 कार्यात्मक विषयों (Functional Subjects) की सूची दी गई है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- ग्यारहवीं अनुसूची: पंचायती राज से संबंधित कुल 29 विषय (जैसे कृषि, भूमि सुधार, लघु सिंचाई, पशुपालन, ग्रामीण आवास आदि)।
- बारहवीं अनुसूची: 74वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा जोड़ी गई, इसमें नगरपालिकाओं के लिए कुल 18 विषय शामिल हैं।
- भाग IX: पंचायतों से संबंधित अनुच्छेद 243 से 243-O तक।
- मध्य प्रदेश: 73वें संविधान संशोधन के तहत त्रिस्तरीय पंचायती राज कानून लागू करने वाला देश का पहला राज्य (1994)।
MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2023 : संवैधानिक व्यवस्था कुल 19 प्रश्न
विषय 5: Constitutional System of India and MP | प्रश्न क्रमांक 1 से 19प्रश्न 1. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की अधिकतम आयु सीमा कितनी है ?
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सही उत्तर : (B) 62 वर्ष
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217(1) के अनुसार, उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक अपना पद धारण करते हैं। मूल संविधान में यह आयु सीमा 60 वर्ष थी जिसे 15वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1963 द्वारा बढ़ाकर 62 वर्ष किया गया था। (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है)।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217(1) के अनुसार, उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक अपना पद धारण करते हैं। मूल संविधान में यह आयु सीमा 60 वर्ष थी जिसे 15वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1963 द्वारा बढ़ाकर 62 वर्ष किया गया था। (सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष है)।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- उच्च न्यायालय न्यायाधीश सेवानिवृत्ति आयु: 62 वर्ष।
- सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीश सेवानिवृत्ति आयु: 65 वर्ष (अनुच्छेद 124(2))।
- त्यागपत्र: उच्च न्यायालय का न्यायाधीश राष्ट्रपति को संबोधित स्वहस्ताक्षरित पत्र द्वारा त्यागपत्र दे सकता है।
प्रश्न 2. भारतीय संविधान के किस संशोधन द्वारा नगरपालिका कानूनों को अद्यतन बना दिया गया है ?
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सही उत्तर : (C) 74
विस्तृत व्याख्या :
74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा भारतीय संविधान में भाग IX-A (9-क), अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तथा 12वीं अनुसूची जोड़कर शहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं/नगर निगमों) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया और नगरपालिका कानूनों को अद्यतन बनाया गया। यह 1 जून 1993 से लागू हुआ।
74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा भारतीय संविधान में भाग IX-A (9-क), अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तथा 12वीं अनुसूची जोड़कर शहरी स्थानीय निकायों (नगरपालिकाओं/नगर निगमों) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया और नगरपालिका कानूनों को अद्यतन बनाया गया। यह 1 जून 1993 से लागू हुआ।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- 74वां संशोधन: नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा (18 विषय 12वीं अनुसूची में)।
- 73वां संशोधन: पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा (29 विषय 11वीं अनुसूची में)।
- त्रिस्तरीय शहरी निकाय: 1. नगर पंचायत (संक्रमणकालीन क्षेत्र), 2. नगर पालिका परिषद (छोटे शहरी क्षेत्र), 3. नगर निगम (बड़े महानगरीय क्षेत्र)।
प्रश्न 3. भारत में स्थानीय स्वशासन के जनक कौन थे ?
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सही उत्तर : (D) लॉर्ड रिपन
विस्तृत व्याख्या :
भारत में स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) का जनक वायसराय ‘लॉर्ड रिपन’ (Lord Ripon) को कहा जाता है। उन्होंने वर्ष 1882 में स्थानीय स्वशासन पर एक प्रसिद्ध प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे भारत में स्थानीय स्वशासन का ‘मैग्नाकार्टा’ (Magna Carta) कहा जाता है।
भारत में स्थानीय स्वशासन (Local Self-Government) का जनक वायसराय ‘लॉर्ड रिपन’ (Lord Ripon) को कहा जाता है। उन्होंने वर्ष 1882 में स्थानीय स्वशासन पर एक प्रसिद्ध प्रस्ताव प्रस्तुत किया था, जिसे भारत में स्थानीय स्वशासन का ‘मैग्नाकार्टा’ (Magna Carta) कहा जाता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- रिपन का कार्यकाल: 1880 से 1884।
- अन्य सुधार: वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट को रद्द करना (1882), प्रथम नियमित जनगणना (1881), प्रथम कारखाना अधिनियम (1881), इल्बर्ट बिल विवाद (1883)।
- फ्लोरेंस नाइटिंगेल: इन्होंने लॉर्ड रिपन को ‘भारत का उद्धारक’ (Saviour of India) कहा था।
प्रश्न 4. कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय राज्य में कौन करता है ?
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सही उत्तर : (C) विधान सभा का अध्यक्ष
विस्तृत व्याख्या :
संविधान के अनुच्छेद 199(3) के अनुसार, यदि यह प्रश्न उठता है कि राज्य विधानमंडल में कोई विधेयक ‘धन विधेयक’ (Money Bill) है या नहीं, तो उस पर संबंधित राज्य की ‘विधान सभा के अध्यक्ष’ (Speaker of Legislative Assembly) का निर्णय अंतिम होता है। केंद्र में यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अनुच्छेद 110(3) के तहत किया जाता है।
संविधान के अनुच्छेद 199(3) के अनुसार, यदि यह प्रश्न उठता है कि राज्य विधानमंडल में कोई विधेयक ‘धन विधेयक’ (Money Bill) है या नहीं, तो उस पर संबंधित राज्य की ‘विधान सभा के अध्यक्ष’ (Speaker of Legislative Assembly) का निर्णय अंतिम होता है। केंद्र में यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष द्वारा अनुच्छेद 110(3) के तहत किया जाता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- राज्यपाल की पूर्व अनुशंसा: धन विधेयक राज्यपाल की पूर्व सहमति/सिफारिश से ही केवल विधान सभा में पेश किया जाता है।
- विधान परिषद की सीमा: विधान परिषद धन विधेयक को अधिकतम केवल 14 दिनों तक रोक सकती है।
प्रश्न 5. निम्नलिखित में से कौन मध्य प्रदेश विधान सभा के प्रथम अध्यक्ष थे ?
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सही उत्तर : (D) पंडित कुंजीलाल दुबे
विस्तृत व्याख्या :
पंडित कुंजीलाल दुबे मध्य प्रदेश विधान सभा के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्होंने 1 नवंबर 1956 से 7 मार्च 1967 तक लगातार तीन कार्यकालों तक मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्हें मध्य प्रदेश का ‘विधि पुरुष’ (Father of MP Parliamentary Tradition) भी कहा जाता है।
पंडित कुंजीलाल दुबे मध्य प्रदेश विधान सभा के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्होंने 1 नवंबर 1956 से 7 मार्च 1967 तक लगातार तीन कार्यकालों तक मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्हें मध्य प्रदेश का ‘विधि पुरुष’ (Father of MP Parliamentary Tradition) भी कहा जाता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रथम विधानसभा उपाध्यक्ष: विष्णु विनायक सरवटे।
- प्रथम विपक्ष के नेता: विष्णुनाथ यादवराव तामस्कर।
- प्रथम प्रोटेम स्पीकर: काशीप्रसाद पाण्डे।
- विधानसभा भवन (मिंटो हॉल): उस समय विधानसभा का संचालन मिंटो हॉल (भोपाल) में होता था।
प्रश्न 6. निम्नलिखित में भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद लोक सेवा आयोगों के व्यय से संबंधित है ?
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सही उत्तर : (C) अनुच्छेद 322
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 322’ (Expenses of Public Service Commissions) लोक सेवा आयोगों के व्ययों से संबंधित है। इसके अनुसार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के व्यय भारत की संचित निधि पर तथा राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के समस्त वेतन, भत्ते और प्रशासनिक व्यय संबंधित राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं।
भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 322’ (Expenses of Public Service Commissions) लोक सेवा आयोगों के व्ययों से संबंधित है। इसके अनुसार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के व्यय भारत की संचित निधि पर तथा राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के समस्त वेतन, भत्ते और प्रशासनिक व्यय संबंधित राज्य की संचित निधि (Consolidated Fund of the State) पर भारित होते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 315: संघ एवं राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग।
- अनुच्छेद 316: सदस्यों की नियुक्ति एवं कार्यकाल।
- अनुच्छेद 320: लोक सेवा आयोगों के कार्य।
- अनुच्छेद 322: लोक सेवा आयोगों के व्यय (संचित निधि पर भारित)।
- अनुच्छेद 323: लोक सेवा आयोगों के वार्षिक प्रतिवेदन (रिपोर्ट)।
प्रश्न 7. ‘योजना आयोग’ के स्थान पर एक नई संस्था ‘नीति आयोग’ का गठन कब किया गया ?
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सही उत्तर : (C) 1 जनवरी, 2015
विस्तृत व्याख्या :
केन्द्रीय मंत्रिमंडल के एक संकल्प द्वारा 65 वर्ष पुराने योजना आयोग (स्थापना 15 मार्च 1950) को समाप्त कर ‘1 जनवरी 2015’ को ‘नीति आयोग’ (NITI Aayog – National Institution for Transforming India) का गठन किया गया। नीति आयोग भारत सरकार का प्रमुख नीतिगत थिंक टैंक है जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) पर कार्य करता है।
केन्द्रीय मंत्रिमंडल के एक संकल्प द्वारा 65 वर्ष पुराने योजना आयोग (स्थापना 15 मार्च 1950) को समाप्त कर ‘1 जनवरी 2015’ को ‘नीति आयोग’ (NITI Aayog – National Institution for Transforming India) का गठन किया गया। नीति आयोग भारत सरकार का प्रमुख नीतिगत थिंक टैंक है जो सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) पर कार्य करता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- पदेन अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री।
- प्रथम उपाध्यक्ष: अरविंद पनगढ़िया।
- प्रथम सीईओ: सिंधुश्री खुल्लर।
- शासी परिषद (Governing Council): सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं।
प्रश्न 8. खाद्य संरक्षण आयोग निम्नलिखित में से किस अधिनियम के अन्तर्गत स्थापित एक वैधानिक निकाय है ?
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सही उत्तर : (A) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013
विस्तृत व्याख्या :
राज्य खाद्य आयोग (Food Commission) की स्थापना ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ (National Food Security Act – NFSA, 2013) की धारा 16 के अंतर्गत एक वैधानिक (Statutory) निकाय के रूप में की जाती है। इसका कार्य अधिनियम के क्रियान्वयन की निगरानी और शिकायतों का निवारण करना है। मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग का गठन 21 जुलाई 2017 को किया गया था।
राज्य खाद्य आयोग (Food Commission) की स्थापना ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ (National Food Security Act – NFSA, 2013) की धारा 16 के अंतर्गत एक वैधानिक (Statutory) निकाय के रूप में की जाती है। इसका कार्य अधिनियम के क्रियान्वयन की निगरानी और शिकायतों का निवारण करना है। मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग का गठन 21 जुलाई 2017 को किया गया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- NFSA 2013 धारा 16: राज्य खाद्य आयोग के गठन का प्रावधान।
- संरचना: 1 अध्यक्ष, 5 अन्य सदस्य और 1 सदस्य-सचिव (जिसमें कम से कम 2 महिलाएं और 1 SC तथा 1 ST सदस्य होना अनिवार्य है)।
- मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग: मुख्यालय भोपाल में स्थित है।
प्रश्न 9. राष्ट्रीय महिला आयोग के कार्य निर्दिष्ट हैं :
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सही उत्तर : (C) राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990 की धारा 10 में
विस्तृत व्याख्या :
‘राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990’ (National Commission for Women Act, 1990) की ‘धारा 10’ में राष्ट्रीय महिला आयोग के कार्यों एवं उत्तरदायित्वों का विस्तृत उल्लेख किया गया है (जैसे महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की समीक्षा, उत्पीड़न की शिकायतों की जांच, सुधारात्मक विधायी कदम सुझाना आदि)।
‘राष्ट्रीय महिला आयोग अधिनियम, 1990’ (National Commission for Women Act, 1990) की ‘धारा 10’ में राष्ट्रीय महिला आयोग के कार्यों एवं उत्तरदायित्वों का विस्तृत उल्लेख किया गया है (जैसे महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों की समीक्षा, उत्पीड़न की शिकायतों की जांच, सुधारात्मक विधायी कदम सुझाना आदि)।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- स्थापना: 31 जनवरी 1992 (धारा 3 के तहत)।
- प्रथम अध्यक्ष: श्रीमती जयंती पटनायक।
- संरचना: 1 अध्यक्ष और 5 सदस्य (केंद्र सरकार द्वारा नामित, कम से कम 1 SC और 1 ST सदस्य अनिवार्य)।
- कार्यकाल: अध्यक्ष एवं सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है।
प्रश्न 10. निम्नलिखित में से कौन-सा अधिकार राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दायरे में नहीं आता है ?
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सही उत्तर : (B) शिक्षा से संबंधित अधिकार
विस्तृत व्याख्या :
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 2(1)(d) के अनुसार, मानवाधिकार का अर्थ है—संविधान द्वारा प्रत्याभूत अथवा अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निहित तथा भारत में न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय ‘जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा’ (Life, Liberty, Equality and Dignity of the Individual) से संबंधित अधिकार। अधिनियम की परिभाषा में ‘शिक्षा से संबंधित अधिकार’ प्रत्यक्ष रूप से इस मूल परिभाषा के दायरे में शामिल नहीं है।
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 2(1)(d) के अनुसार, मानवाधिकार का अर्थ है—संविधान द्वारा प्रत्याभूत अथवा अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निहित तथा भारत में न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय ‘जीवन, स्वतंत्रता, समानता और व्यक्ति की गरिमा’ (Life, Liberty, Equality and Dignity of the Individual) से संबंधित अधिकार। अधिनियम की परिभाषा में ‘शिक्षा से संबंधित अधिकार’ प्रत्यक्ष रूप से इस मूल परिभाषा के दायरे में शामिल नहीं है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- NHRC परिभाषा (धारा 2(1)(d)): जीवन (Life), स्वतंत्रता (Liberty), समानता (Equality) और गरिमा (Dignity)।
- NHRC स्थापना: 12 अक्टूबर 1993।
- प्रथम अध्यक्ष: न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्र।
प्रश्न 11. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अधिकतम कितने वर्षों के लिए अपना पद धारण कर सकते हैं ?
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सही उत्तर : (C) 6 वर्ष
विस्तृत व्याख्या :
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG – Comptroller and Auditor General of India) का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से ‘6 वर्ष’ की अवधि या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) होता है। यह CAG (कर्तव्य, शक्तियां एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 द्वारा निर्धारित है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG – Comptroller and Auditor General of India) का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से ‘6 वर्ष’ की अवधि या 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक (जो भी पहले हो) होता है। यह CAG (कर्तव्य, शक्तियां एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 द्वारा निर्धारित है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 148 से 151 तक।
- डॉ. अम्बेडकर का कथन: ‘कैग भारतीय संविधान के तहत सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी होगा।’ वह सार्वजनिक पर्स का संरक्षक (Guardian of Public Purse) होता है।
- पुनर्नियुक्ति पर रोक: सेवानिवृत्ति के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद का पात्र नहीं होता।
- प्रथम CAG: वी. नरहरि राव (1948-1954)।
प्रश्न 12. सिविल सेवा परीक्षा की समीक्षा हेतु संघ लोक सेवा आयोग ने जुलाई 2000 में किसकी अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया ?
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सही उत्तर : (D) प्रोफेसर योगिन्दर कुमार अलघ
विस्तृत व्याख्या :
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा की संपूर्ण चयन प्रणाली और पाठ्यक्रम की व्यापक समीक्षा हेतु जुलाई 2000 में प्रख्यात अर्थशास्त्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री ‘प्रोफेसर वाई.के. अलघ’ (Prof. Yoginder K. Alagh) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने वर्ष 2001 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा की संपूर्ण चयन प्रणाली और पाठ्यक्रम की व्यापक समीक्षा हेतु जुलाई 2000 में प्रख्यात अर्थशास्त्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री ‘प्रोफेसर वाई.के. अलघ’ (Prof. Yoginder K. Alagh) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने वर्ष 2001 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अलघ समिति (2000-2001): सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में एप्टीट्यूड टेस्ट और भाषा दक्षता सुधार की सिफारिश की।
- कोठारी समिति (1974-76): त्रिस्तरीय परीक्षा प्रणाली (प्रारंभिक, मुख्य, साक्षात्कार) की सिफारिश की थी।
- होता समिति (2004): सिविल सेवा सुधारों एवं भर्ती सुधारों हेतु गठित समिति।
प्रश्न 13. राष्ट्रपति के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में कौन-से सदस्य शामिल होते हैं ?
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सही उत्तर : (C) संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा होता है, जिसमें शामिल होते हैं:
1. संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के ‘केवल निर्वाचित सदस्य’।
2. सभी राज्यों की विधान सभाओं के ‘केवल निर्वाचित सदस्य’।
3. दिल्ली और पुदुच्चेरी (70वें संशोधन 1992 द्वारा) तथा जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
मनोनीत सदस्य तथा राज्य विधान परिषदों (MLC) के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार, राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा होता है, जिसमें शामिल होते हैं:
1. संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के ‘केवल निर्वाचित सदस्य’।
2. सभी राज्यों की विधान सभाओं के ‘केवल निर्वाचित सदस्य’।
3. दिल्ली और पुदुच्चेरी (70वें संशोधन 1992 द्वारा) तथा जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य।
मनोनीत सदस्य तथा राज्य विधान परिषदों (MLC) के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 55: राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति (आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा – Single Transferable Vote)।
- मनोनीत सदस्य: राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं दे सकते, परंतु महाभियोग (अनुच्छेद 61) में भाग लेते हैं।
- विधान परिषद सदस्य: राष्ट्रपति के चुनाव और महाभियोग दोनों में भाग नहीं लेते।
प्रश्न 14. राज्य के नीति निर्देशक तत्त्वों की व्याख्या भारतीय संविधान के पार्ट IV-क में की गई है। यह व्यवस्था किस देश के संविधान से ली गई है ?
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सही उत्तर : (D) आयरलैण्ड
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP – भाग IV, अनुच्छेद 36 से 51) ‘आयरलैंड’ के संविधान (1937) से प्रेरित होकर ग्रहण किए गए हैं (आयरलैंड ने इसे स्पेनिश संविधान से लिया था)। ये राज्य के लिए सकारात्मक निर्देश हैं जिनका उद्देश्य भारत में ‘कल्याणकारी राज्य’ (Welfare State) की स्थापना करना है।
भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP – भाग IV, अनुच्छेद 36 से 51) ‘आयरलैंड’ के संविधान (1937) से प्रेरित होकर ग्रहण किए गए हैं (आयरलैंड ने इसे स्पेनिश संविधान से लिया था)। ये राज्य के लिए सकारात्मक निर्देश हैं जिनका उद्देश्य भारत में ‘कल्याणकारी राज्य’ (Welfare State) की स्थापना करना है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रकृति: ये गैर-न्यायसंगत (Non-justiciable) हैं, अर्थात् इनके उल्लंघन पर अदालत में वाद दायर नहीं किया जा सकता (अनुच्छेद 37)।
- डॉ. अम्बेडकर: इन्होंने नीति निदेशक तत्वों को संविधान की ‘अनोखी विशेषता’ (Novel Feature) कहा था।
- ग्रेनविले ऑस्टिन: इन्होंने मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों को ‘संविधान की अंतरात्मा’ (Conscience of the Constitution) कहा।
प्रश्न 15. संसद का निर्माण निम्नलिखित में से किनके द्वारा होता है ?
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सही उत्तर : (C) लोक सभा, राज्य सभा और राष्ट्रपति
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 79’ के अनुसार, संघ के लिए एक संसद होगी जो ‘राष्ट्रपति और दो सदनों’—जिन्हें क्रमशः राज्य सभा (उच्च सदन) और लोक सभा (निम्न सदन) कहा जाएगा—से मिलकर बनेगी। यद्यपि राष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता, फिर भी वह संसद का अभिन्न अंग होता है क्योंकि कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की सहमति के बिना अधिनियम नहीं बन सकता।
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 79’ के अनुसार, संघ के लिए एक संसद होगी जो ‘राष्ट्रपति और दो सदनों’—जिन्हें क्रमशः राज्य सभा (उच्च सदन) और लोक सभा (निम्न सदन) कहा जाएगा—से मिलकर बनेगी। यद्यपि राष्ट्रपति संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होता, फिर भी वह संसद का अभिन्न अंग होता है क्योंकि कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की सहमति के बिना अधिनियम नहीं बन सकता।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 79: संसद का गठन (राष्ट्रपति + राज्यसभा + लोकसभा)।
- अनुच्छेद 80: राज्य सभा की संरचना (अधिकतम 250 सदस्य)।
- अनुच्छेद 81: लोक सभा की संरचना (अधिकतम 550 सदस्य)।
प्रश्न 16. शिक्षा का अधिकार किस संविधान संशोधन द्वारा मौलिक अधिकार में शामिल किया गया ?
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सही उत्तर : (D) छियासीवाँ संविधान संशोधन
विस्तृत व्याख्या :
’86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002′ द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21-A जोड़कर 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया।
’86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002′ द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21-A जोड़कर 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 21A: शिक्षा का मौलिक अधिकार।
- अनुच्छेद 45 संशोधन: 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा।
- 11वां मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(k)): 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अवसर प्रदान करना माता-पिता/संरक्षक का कर्तव्य बनाया गया।
प्रश्न 17. अनुच्छेद 51-क मौलिक कर्तव्य की व्याख्या करता है। फिलहाल कितने मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है ?
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सही उत्तर : (B) 11
विस्तृत व्याख्या :
वर्तमान समय में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A (भाग IV-A) में कुल ’11 मौलिक कर्तव्यों’ (Fundamental Duties) का उल्लेख है। 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित होकर 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए थे। बाद में 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा 11वां मौलिक कर्तव्य (शिक्षा का अवसर) जोड़ा गया।
वर्तमान समय में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A (भाग IV-A) में कुल ’11 मौलिक कर्तव्यों’ (Fundamental Duties) का उल्लेख है। 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित होकर 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए थे। बाद में 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा 11वां मौलिक कर्तव्य (शिक्षा का अवसर) जोड़ा गया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- मूल संविधान में: शून्य मौलिक कर्तव्य थे।
- 42वां संशोधन 1976: 10 मौलिक कर्तव्य जोड़े गए।
- 86वां संशोधन 2002: 11वां मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया।
- प्रकृति: मौलिक कर्तव्य गैर-न्यायसंगत हैं और इनके क्रियान्वयन हेतु संसद कानून बना सकती है।
प्रश्न 18. किस संविधान संशोधन के द्वारा प्रस्तावना में ‘समाजवादी’ शब्द जोड़ा गया था ?
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सही उत्तर : (C) बयालीसवाँ संविधान संशोधन
विस्तृत व्याख्या :
’42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976′ द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में तीन नए शब्द जोड़े गए थे: ‘समाजवादी’ (Socialist), ‘पंथनिरपेक्ष / धर्मनिरपेक्ष’ (Secular) और ‘अखंडता’ (Integrity)। अब तक प्रस्तावना में केवल एक ही बार (1976 में) संशोधन किया गया है।
’42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976′ द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में तीन नए शब्द जोड़े गए थे: ‘समाजवादी’ (Socialist), ‘पंथनिरपेक्ष / धर्मनिरपेक्ष’ (Secular) और ‘अखंडता’ (Integrity)। अब तक प्रस्तावना में केवल एक ही बार (1976 में) संशोधन किया गया है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- लघु संविधान (Mini Constitution): 42वें संविधान संशोधन को व्यापक परिवर्तनों के कारण मिनी संविधान कहा जाता है।
- स्वर्ण सिंह समिति: 42वें संशोधन के अधिकांश प्रावधान इस समिति की सिफारिशों पर आधारित थे।
- केशवानंद भारती वाद (1973): सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन हो सकता है, बशर्ते मूल ढांचा न बदले।
प्रश्न 19. संविधान सभा का निर्माण किस योजना के तहत किया गया था ?
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सही उत्तर : (B) कैबिनेट मिशन योजना
विस्तृत व्याख्या :
भारत की संविधान सभा का गठन ब्रिटिश सरकार द्वारा मार्च 1946 में भारत भेजे गए ‘कैबिनेट मिशन’ (Cabinet Mission Plan, 1946) के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया था। कैबिनेट मिशन के तीन सदस्य थे: लॉर्ड पैथिक लॉरेंस (भारत सचिव), सर स्टेफोर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष) और ए.वी. अलेक्जेंडर (नौसेना प्रमुख)।
भारत की संविधान सभा का गठन ब्रिटिश सरकार द्वारा मार्च 1946 में भारत भेजे गए ‘कैबिनेट मिशन’ (Cabinet Mission Plan, 1946) के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया था। कैबिनेट मिशन के तीन सदस्य थे: लॉर्ड पैथिक लॉरेंस (भारत सचिव), सर स्टेफोर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष) और ए.वी. अलेक्जेंडर (नौसेना प्रमुख)।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- कुल सदस्य संख्या: कैबिनेट मिशन योजना के तहत 389 सीटें तय की गई थीं (296 ब्रिटिश भारत + 93 देशी रियासतें)।
- सीट आवंटन: प्रति 10 लाख की आबादी पर लगभग 1 सीट आवंटित की गई थी।
- चुनाव प्रणाली: प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से अप्रत्यक्ष निर्वाचन हुआ था।
MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2022 : संवैधानिक व्यवस्था कुल 24 प्रश्न
विषय 5: Constitutional System of India and MP | प्रश्न क्रमांक 1 से 24प्रश्न 1. मध्यप्रदेश में पहली महिला राज्यपाल कौन थीं ?
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सही उत्तर : (A) सरला ग्रेवाल
विस्तृत व्याख्या :
श्रीमती सरला ग्रेवाल मध्य प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल थीं। उन्होंने 31 मार्च 1989 से 5 फरवरी 1990 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। वे 1952 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी थीं और भारत की दूसरी महिला IAS अधिकारी तथा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रधान सचिव भी रही थीं।
श्रीमती सरला ग्रेवाल मध्य प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल थीं। उन्होंने 31 मार्च 1989 से 5 फरवरी 1990 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य किया। वे 1952 बैच की वरिष्ठ IAS अधिकारी थीं और भारत की दूसरी महिला IAS अधिकारी तथा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की प्रधान सचिव भी रही थीं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- मध्य प्रदेश की दूसरी महिला राज्यपाल: श्रीमती आनंदीबेन पटेल (2018-2019 एवं 2020-2021)।
- मध्य प्रदेश की पहली महिला मुख्यमंत्री: सुश्री उमा भारती (2003-2004)।
- मध्य प्रदेश की पहली महिला मुख्य सचिव: निर्मला बुच (1991)।
प्रश्न 2. मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायत घोषित होने के लिए न्यूनतम जनसंख्या कितनी है ?
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सही उत्तर : (B) 1000
विस्तृत व्याख्या :
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के अनुसार, किसी गाँव या गाँवों के समूह को एक स्वतंत्र ‘ग्राम पंचायत’ घोषित करने के लिए न्यूनतम जनसंख्या ‘1,000’ होना अनिवार्य है। 1,000 की आबादी पर कम से कम 10 वार्ड बनाए जाते हैं।
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के अनुसार, किसी गाँव या गाँवों के समूह को एक स्वतंत्र ‘ग्राम पंचायत’ घोषित करने के लिए न्यूनतम जनसंख्या ‘1,000’ होना अनिवार्य है। 1,000 की आबादी पर कम से कम 10 वार्ड बनाए जाते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- वार्ड संख्या: न्यूनतम 10 और अधिकतम 20 वार्ड (जनसंख्या के आधार पर)।
- जनपद पंचायत हेतु जनसंख्या: न्यूनतम 5,000 की जनसंख्या पर जनपद पंचायत बनती है।
- जिला पंचायत हेतु जनसंख्या: न्यूनतम 50,000 की जनसंख्या पर जिला पंचायत वार्ड बनते हैं।
प्रश्न 3. मध्यप्रदेश में कितनी बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया ?
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सही उत्तर : (C) तीन
विस्तृत व्याख्या :
मध्यप्रदेश में अब तक कुल 3 बार (Article 356 के तहत) राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है:
1. प्रथम: 30 अप्रैल 1977 से 23 जून 1977 (राज्यपाल: सत्य नारायण सिन्हा; CM: श्यामाचरण शुक्ल)
2. द्वितीय: 17 फरवरी 1980 से 9 जून 1980 (राज्यपाल: सी.एम. पुनाचा; CM: सुंदरलाल पटवा)
3. तृतीय: 15 दिसंबर 1992 से 6 दिसंबर 1993 (राज्यपाल: कुंवर महमूद अली खान; CM: सुंदरलाल पटवा)।
मध्यप्रदेश में अब तक कुल 3 बार (Article 356 के तहत) राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है:
1. प्रथम: 30 अप्रैल 1977 से 23 जून 1977 (राज्यपाल: सत्य नारायण सिन्हा; CM: श्यामाचरण शुक्ल)
2. द्वितीय: 17 फरवरी 1980 से 9 जून 1980 (राज्यपाल: सी.एम. पुनाचा; CM: सुंदरलाल पटवा)
3. तृतीय: 15 दिसंबर 1992 से 6 दिसंबर 1993 (राज्यपाल: कुंवर महमूद अली खान; CM: सुंदरलाल पटवा)।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- सबसे लंबा राष्ट्रपति शासन: तीसरा राष्ट्रपति शासन (लगभग 1 वर्ष)।
- सर्वाधिक बार राष्ट्रपति शासन झेलने वाले मुख्यमंत्री: सुंदरलाल पटवा (दो बार सरकार बर्खास्त)।
प्रश्न 4. मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में निम्नांकित में से कौन मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करता है ?
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सही उत्तर : (B) मुख्यमंत्री द्वारा नाम निर्दिष्ट मंत्री
विस्तृत व्याख्या :
मध्य प्रदेश कार्य संचालन नियम (Rules of Business) के अनुसार, यदि मुख्यमंत्री किसी कारणवश अनुपस्थित हैं, तो मंत्रिपरिषद (Cabinet) की बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत या ‘नाम निर्दिष्ट मंत्री’ (Minister Nominated by the Chief Minister) द्वारा की जाती है। यदि किसी को नामित नहीं किया गया है, तो वरिष्ठता क्रम में प्रथम मंत्री अध्यक्षता करता है।
मध्य प्रदेश कार्य संचालन नियम (Rules of Business) के अनुसार, यदि मुख्यमंत्री किसी कारणवश अनुपस्थित हैं, तो मंत्रिपरिषद (Cabinet) की बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री द्वारा विशेष रूप से प्राधिकृत या ‘नाम निर्दिष्ट मंत्री’ (Minister Nominated by the Chief Minister) द्वारा की जाती है। यदि किसी को नामित नहीं किया गया है, तो वरिष्ठता क्रम में प्रथम मंत्री अध्यक्षता करता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- मंत्रिपरिषद की अध्यक्षता: सामान्यतः मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है।
- अनुच्छेद 163: राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद होगी।
- अनुच्छेद 164: मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर राज्यपाल करेगा।
प्रश्न 5. मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री कौन थे ?
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सही उत्तर : (A) रविशंकर शुक्ला
विस्तृत व्याख्या :
पंडित रविशंकर शुक्ल 1 नवंबर 1956 को नवगठित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने थे। इससे पूर्व वे 1946 से 1956 तक मध्य प्रांत एवं बरार (Central Provinces and Berar) के प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री रहे थे। 31 दिसंबर 1956 को पद पर रहते हुए उनका निधन हो गया था।
पंडित रविशंकर शुक्ल 1 नवंबर 1956 को नवगठित मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री बने थे। इससे पूर्व वे 1946 से 1956 तक मध्य प्रांत एवं बरार (Central Provinces and Berar) के प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री रहे थे। 31 दिसंबर 1956 को पद पर रहते हुए उनका निधन हो गया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- कार्यकाल: 1 नवंबर 1956 से 31 दिसंबर 1956 (पद पर रहते हुए निधन)।
- द्वितीय मुख्यमंत्री: भगवंतराव मंडलोई (कार्यवाहक रूप में 1 जनवरी 1957 से)।
- पंडित रविशंकर शुक्ल विवि: रायपुर (छत्तीसगढ़) में इनके नाम पर विश्वविद्यालय स्थित है।
प्रश्न 6. राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्यों की नियुक्ति हेतु गठित समिति की अध्यक्षता कौन करता है ?
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सही उत्तर : (B) मुख्यमंत्री
विस्तृत व्याख्या :
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22(1) के अनुसार, राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है, जिसके ‘अध्यक्ष मुख्यमंत्री’ होते हैं।
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22(1) के अनुसार, राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा एक उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है, जिसके ‘अध्यक्ष मुख्यमंत्री’ होते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- चयन समिति के सदस्य (4 सदस्य): 1. मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), 2. विधानसभा अध्यक्ष, 3. राज्य का गृह मंत्री, 4. विधानसभा में विपक्ष का नेता।
- विधान परिषद होने पर (6 सदस्य): विधान परिषद का सभापति और विधान परिषद में विपक्ष का नेता भी शामिल होते हैं।
- मध्य प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग: गठन 13 सितंबर 1995 को हुआ; मुख्यालय भोपाल (पर्यावास भवन) में है।
प्रश्न 7. मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) अधिनियम, 2021 के अंतर्गत कितने अशासकीय सदस्य हो सकते हैं ?
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सही उत्तर : (C) पाँच
विस्तृत व्याख्या :
‘मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) अधिनियम, 2021’ के अनुसार, आयोग में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष सहित कुल ‘5 अशासकीय सदस्य’ (Five Non-official Members) होंगे, जो पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का विशेष ज्ञान रखने वाले होंगे। इनमें से कम से कम एक सदस्य महिला तथा एक सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग का होना अनिवार्य है।
‘मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) अधिनियम, 2021’ के अनुसार, आयोग में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष सहित कुल ‘5 अशासकीय सदस्य’ (Five Non-official Members) होंगे, जो पिछड़े वर्गों से संबंधित मामलों का विशेष ज्ञान रखने वाले होंगे। इनमें से कम से कम एक सदस्य महिला तथा एक सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग का होना अनिवार्य है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- संशोधन 2021: सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 5 अशासकीय सदस्य की गई।
- मूल आयोग गठन: मध्य प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग अधिनियम 1995 के तहत 13 मार्च 1993 को गठित हुआ था।
- कार्यकाल: अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अवधि (सामान्यतः 3 वर्ष) तक होता है।
प्रश्न 8. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के संदर्भ में कथनों का विश्लेषण कीजिए :
(i) मानव अधिकार आयोग, मानव अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को प्रोत्साहित करता है।
(ii) आयोग का काम मानवाधिकार क्षेत्र में अनुसंधान करना भी है।
निम्नलिखित में से उत्तर दीजिए :
(i) मानव अधिकार आयोग, मानव अधिकार के क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को प्रोत्साहित करता है।
(ii) आयोग का काम मानवाधिकार क्षेत्र में अनुसंधान करना भी है।
निम्नलिखित में से उत्तर दीजिए :
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सही उत्तर : (D) दोनों कथन (i) और (ii) सत्य हैं।
विस्तृत व्याख्या :
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्यों में स्पष्ट रूप से शामिल है:
• धारा 12(i): मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और संस्थाओं के प्रयासों को प्रोत्साहित करना।
• धारा 12(g): मानवाधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान (Research) करना और उसका संवर्धन करना।
अतः दोनों कथन (i) और (ii) पूर्णतः सत्य हैं।
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के अंतर्गत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कार्यों में स्पष्ट रूप से शामिल है:
• धारा 12(i): मानवाधिकार के क्षेत्र में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और संस्थाओं के प्रयासों को प्रोत्साहित करना।
• धारा 12(g): मानवाधिकारों के क्षेत्र में अनुसंधान (Research) करना और उसका संवर्धन करना।
अतः दोनों कथन (i) और (ii) पूर्णतः सत्य हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- NHRC के अन्य कार्य: जेलों का निरीक्षण, मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच (दीवानी न्यायालय की शक्तियां), संधियों व अंतर्राष्ट्रीय दस्तावेजों का अध्ययन।
- दीवानी अदालत की शक्तियां: धारा 13 के तहत आयोग को साक्षियों को समन करने, शपथ पत्र पर साक्ष्य लेने का अधिकार है।
प्रश्न 9. संघ तथा राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग का प्रावधान संविधान के किस अनुच्छेद में है ?
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सही उत्तर : (B) अनुच्छेद 315
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के भाग XIV के अध्याय II के अंतर्गत ‘अनुच्छेद 315’ में संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) तथा प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के गठन का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान है। दो या अधिक राज्य आपसी सहमति से संयुक्त लोक सेवा आयोग (JSPSC) भी बना सकते हैं।
भारतीय संविधान के भाग XIV के अध्याय II के अंतर्गत ‘अनुच्छेद 315’ में संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) तथा प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के गठन का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान है। दो या अधिक राज्य आपसी सहमति से संयुक्त लोक सेवा आयोग (JSPSC) भी बना सकते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 315(1): संघ के लिए UPSC और राज्यों के लिए SPSC।
- अनुच्छेद 315(2): दो या अधिक राज्यों के लिए संयुक्त लोक सेवा आयोग (संसद विधि द्वारा गठित करती है)।
- अनुच्छेद 340: पिछड़े वर्गों की दशाओं के अन्वेषण के लिए आयोग की नियुक्ति।
प्रश्न 10. भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक के वेतन एवं सेवा शर्तें कहाँ पर विनिर्दिष्ट हैं ?
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सही उत्तर : (B) द्वितीय अनुसूची, भारत का संविधान
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148(3) के अनुसार भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) के वेतन, विशेषाधिकार और सेवा शर्तें संसद द्वारा विधि द्वारा निर्धारित की जाती हैं और जब तक ऐसा नहीं किया जाता, तब तक वे संविधान की ‘द्वितीय अनुसूची’ (Second Schedule) के भाग ‘ङ’ (Part E) में विनिर्दिष्ट प्रावधानों के अनुसार होंगी।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148(3) के अनुसार भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (CAG) के वेतन, विशेषाधिकार और सेवा शर्तें संसद द्वारा विधि द्वारा निर्धारित की जाती हैं और जब तक ऐसा नहीं किया जाता, तब तक वे संविधान की ‘द्वितीय अनुसूची’ (Second Schedule) के भाग ‘ङ’ (Part E) में विनिर्दिष्ट प्रावधानों के अनुसार होंगी।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- द्वितीय अनुसूची: राष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा/विधानसभा अध्यक्ष, SC/HC के न्यायाधीश और CAG के वेतन एवं भत्तों का उल्लेख।
- तृतीय अनुसूची: विभिन्न संवैधानिक पदाधिकारियों द्वारा ली जाने वाली ‘शपथ या प्रतिज्ञान’ के प्रारूप।
- वेतन का स्तर: CAG को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के बराबर वेतन (₹2,50,000 प्रति माह) मिलता है।
प्रश्न 11. मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग कब अस्तित्व में आया था ?
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सही उत्तर : (B) 1 फरवरी, 1994
विस्तृत व्याख्या :
73वें और 74वें संविधान संशोधन (अनुच्छेद 243-K और 243-ZA) के अनुसरण में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘1 फरवरी 1994’ को मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की विधिवत अधिसूचना जारी कर इसका गठन किया गया था। मध्य प्रदेश 73वें संशोधन के तहत राज्य निर्वाचन आयोग गठित करने वाला देश का पहला राज्य था।
73वें और 74वें संविधान संशोधन (अनुच्छेद 243-K और 243-ZA) के अनुसरण में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘1 फरवरी 1994’ को मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की विधिवत अधिसूचना जारी कर इसका गठन किया गया था। मध्य प्रदेश 73वें संशोधन के तहत राज्य निर्वाचन आयोग गठित करने वाला देश का पहला राज्य था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रथम राज्य मुख्य निर्वाचन आयुक्त: श्री एन.बी. लोहानी (15 फरवरी 1994 को कार्यभार ग्रहण किया)।
- ध्येय वाक्य: ‘हर वोट कीमती, हर निकाय महत्वपूर्ण’।
- कार्य: राज्य की त्रिस्तरीय पंचायतों और नगरीय निकायों के चुनावों का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण।
प्रश्न 12. नीति आयोग के उपाध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है ?
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सही उत्तर : (B) भारत के प्रधानमंत्री
विस्तृत व्याख्या :
नीति आयोग के संकल्प के अनुसार, नीति आयोग के उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson) की नियुक्ति आयोग के पदेन अध्यक्ष अर्थात् ‘भारत के प्रधानमंत्री’ द्वारा की जाती है। उपाध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister) का दर्जा प्राप्त होता है।
नीति आयोग के संकल्प के अनुसार, नीति आयोग के उपाध्यक्ष (Vice-Chairperson) की नियुक्ति आयोग के पदेन अध्यक्ष अर्थात् ‘भारत के प्रधानमंत्री’ द्वारा की जाती है। उपाध्यक्ष को कैबिनेट मंत्री (Cabinet Minister) का दर्जा प्राप्त होता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- उपाध्यक्ष का पद: कैबिनेट मंत्री के समकक्ष।
- प्रथम उपाध्यक्ष: डॉ. अरविंद पनगढ़िया।
- द्वितीय उपाध्यक्ष: डॉ. राजीव कुमार।
- वर्तमान उपाध्यक्ष: सुमन बेरी।
प्रश्न 13. सतर्कता के क्षेत्र में केन्द्रीय एजेंसीज़ को सलाह एवं मार्गदर्शन देने हेतु केन्द्रीय सतर्कता आयोग की स्थापना किसकी अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिश पर आधारित है ?
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सही उत्तर : (B) के. संथानम
विस्तृत व्याख्या :
भ्रष्टाचार निवारण हेतु वर्ष 1962 में गठित ‘के. संथानम समिति’ (K. Santhanam Committee on Prevention of Corruption) की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा फरवरी 1964 में ‘केन्द्रीय सतर्कता आयोग’ (Central Vigilance Commission – CVC) की स्थापना की गई थी। बाद में संसद द्वारा 2003 में इसे सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया।
भ्रष्टाचार निवारण हेतु वर्ष 1962 में गठित ‘के. संथानम समिति’ (K. Santhanam Committee on Prevention of Corruption) की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा फरवरी 1964 में ‘केन्द्रीय सतर्कता आयोग’ (Central Vigilance Commission – CVC) की स्थापना की गई थी। बाद में संसद द्वारा 2003 में इसे सांविधिक दर्जा प्रदान किया गया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- सीवीसी अधिनियम: वर्ष 2003 में पारित हुआ (सांविधिक दर्जा)।
- संरचना: 1 केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) और अधिकतम 2 सतर्कता आयुक्त (VCs)।
- कार्यकाल: 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (यह 4 वर्ष का कार्यकाल विशिष्ट है)।
- नियुक्ति: राष्ट्रपति द्वारा 3 सदस्यीय समिति (प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, लोकसभा में विपक्ष का नेता) की सिफारिश पर।
प्रश्न 14. निम्नलिखित में से कौन राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त नहीं हो सकता है ?
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सही उत्तर : (D) राज्य क्षेत्र के विधानमंडल का सदस्य
विस्तृत व्याख्या :
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) की धारा 15(6) में स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त संसद का सदस्य या किसी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के ‘विधानमंडल का सदस्य नहीं होगा’, न ही वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होगा या कोई अन्य लाभ का पद धारण करेगा।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) की धारा 15(6) में स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त संसद का सदस्य या किसी राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के ‘विधानमंडल का सदस्य नहीं होगा’, न ही वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होगा या कोई अन्य लाभ का पद धारण करेगा।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- पात्र क्षेत्र (धारा 15(5)): विधि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता, जनसंचार या प्रशासन का व्यापक ज्ञान और अनुभव।
- चयन समिति: मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा में विपक्ष का नेता, और मुख्यमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री।
प्रश्न 15. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अन्तर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का गठन किया गया है ?
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सही उत्तर : (B) अनुच्छेद 338
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 338’ के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का गठन किया गया है। 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा 19 फरवरी 2004 को पृथक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अस्तित्व में आया।
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 338’ के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का गठन किया गया है। 89वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा 19 फरवरी 2004 को पृथक राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अस्तित्व में आया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 338: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC)।
- अनुच्छेद 338A: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)।
- अनुच्छेद 338B: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC)।
- संरचना: 1 अध्यक्ष, 1 उपाध्यक्ष और 3 अन्य सदस्य (कार्यकाल 3 वर्ष)।
प्रश्न 16. भारतीय लोक सभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे ?
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सही उत्तर : (A) श्री गणेश वासुदेव मावलंकर
विस्तृत व्याख्या :
श्री गणेश वासुदेव मावलंकर (जी.वी. मावलंकर) स्वतंत्र भारत की प्रथम लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्होंने 15 मई 1952 से 27 फरवरी 1956 (मृत्यु पर्यंत) तक लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। पं. जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें आदरपूर्वक ‘लोकसभा का पिता’ (Father of Lok Sabha) की उपाधि दी थी।
श्री गणेश वासुदेव मावलंकर (जी.वी. मावलंकर) स्वतंत्र भारत की प्रथम लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष थे। उन्होंने 15 मई 1952 से 27 फरवरी 1956 (मृत्यु पर्यंत) तक लोकसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। पं. जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें आदरपूर्वक ‘लोकसभा का पिता’ (Father of Lok Sabha) की उपाधि दी थी।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- उपनाम: ‘दादासाहेब मावलंकर’ और ‘फादर ऑफ लोकसभा’।
- प्रथम उपाध्यक्ष: एम. अनंतशयनम अय्यंगार (मावलंकर जी के निधन के बाद वे दूसरे अध्यक्ष बने)।
- संविधान सभा (विधायी शाखा): 1947 से 1952 के दौरान संविधान सभा जब विधायिका के रूप में बैठती थी, तब भी मावलंकर जी ही अध्यक्षता करते थे।
प्रश्न 17. भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति किस अनुच्छेद से प्राप्त होती है ?
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सही उत्तर : (A) अनुच्छेद 72
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 72’ के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा (Pardon), उसका प्रविलंबन (Reprieve), विराम (Respite), परिहार (Remission), या लघुकरण (Commutation) करने की व्यापक संवैधानिक शक्ति प्राप्त है। इसमें मृत्युदंड और कोर्ट-मार्शल (सैन्य अदालत) द्वारा दिए गए दंड भी शामिल हैं।
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 72’ के तहत राष्ट्रपति को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी व्यक्ति के दंड को क्षमा (Pardon), उसका प्रविलंबन (Reprieve), विराम (Respite), परिहार (Remission), या लघुकरण (Commutation) करने की व्यापक संवैधानिक शक्ति प्राप्त है। इसमें मृत्युदंड और कोर्ट-मार्शल (सैन्य अदालत) द्वारा दिए गए दंड भी शामिल हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- क्षमादान के 5 रूप: 1. क्षमा (दोष व दंड दोनों से पूर्ण मुक्ति), 2. लघुकरण (दंड का स्वरूप बदलना), 3. परिहार (अवधि कम करना), 4. विराम (विशेष परिस्थिति में कम सजा), 5. प्रविलंबन (अस्थायी रोक)।
- अनुच्छेद 161: राज्यपाल की क्षमादान शक्ति (राज्यपाल मृत्युदंड और सैन्य अदालत के दंड को माफ नहीं कर सकता)।
प्रश्न 18. मौलिक अधिकारों के बारे में निम्नलिखित शब्द किसने कहे : “एक मौलिक अधिकार को उस क्षण की किसी विशेष कठिनाई के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक ऐसी चीज़ के रूप में जिसे आप संविधान में स्थायी बनाना चाहते हैं” ?
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सही उत्तर : (B) जवाहरलाल नेहरू
विस्तृत व्याख्या :
संविधान सभा में मौलिक अधिकारों पर ऐतिहासिक बहस के दौरान पं. जवाहरलाल नेहरू ने यह विचार व्यक्त किया था कि मौलिक अधिकारों को तात्कालिक कठिनाइयों या अल्पकालिक समस्याओं के दृष्टिकोण से सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इन्हें एक ऐसे शाश्वत और स्थायी मूल्य के रूप में देखना चाहिए जिसे हम संविधान में सदैव के लिए स्थापित करना चाहते हैं।
संविधान सभा में मौलिक अधिकारों पर ऐतिहासिक बहस के दौरान पं. जवाहरलाल नेहरू ने यह विचार व्यक्त किया था कि मौलिक अधिकारों को तात्कालिक कठिनाइयों या अल्पकालिक समस्याओं के दृष्टिकोण से सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इन्हें एक ऐसे शाश्वत और स्थायी मूल्य के रूप में देखना चाहिए जिसे हम संविधान में सदैव के लिए स्थापित करना चाहते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- संविधान सभा में मौलिक अधिकार परामर्श समिति: अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल थे।
- मौलिक अधिकार उप-समिति: अध्यक्ष जे.बी. कृपलानी थे।
- नेहरू रिपोर्ट (1928): भारत में मौलिक अधिकारों की मांग को औपचारिक रूप से सर्वप्रथम नेहरू रिपोर्ट में विस्तार से शामिल किया गया था।
प्रश्न 19. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद राष्ट्रपति के महाभियोग से संबंधित प्रावधानों को प्रदान करता है ?
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सही उत्तर : (C) अनुच्छेद 61
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 61’ राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) चलाने की विशिष्ट प्रक्रिया प्रदान करता है। महाभियोग केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर संसद के किसी भी सदन द्वारा लाया जा सकता है।
भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 61’ राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) चलाने की विशिष्ट प्रक्रिया प्रदान करता है। महाभियोग केवल संविधान के उल्लंघन के आधार पर संसद के किसी भी सदन द्वारा लाया जा सकता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- नोटिस अवधि: 14 दिन पूर्व लिखित सूचना अनिवार्य।
- पारित होने का बहुमत: सदन की कुल सदस्य संख्या का 2/3 विशेष बहुमत दोनों सदनों में अनिवार्य।
- अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया: इसे संसद की अर्ध-न्यायिक (Quasi-judicial) कार्यवाही कहा जाता है।
प्रश्न 20. भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के अनुसार भारत का राष्ट्रपति (मुख्य न्यायाधीश की परामर्श से) किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में स्थानांतरित करता है ?
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सही उत्तर : (A) अनुच्छेद 222
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 222(1)’ के अनुसार, भारत का राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श करने के पश्चात किसी न्यायाधीश को एक उच्च न्यायालय से किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरित (Transfer) कर सकता है। कॉलेजियम प्रणाली के अनुसार CJI के साथ चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की सहमति से यह प्रक्रिया संचालित होती है।
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 222(1)’ के अनुसार, भारत का राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श करने के पश्चात किसी न्यायाधीश को एक उच्च न्यायालय से किसी अन्य उच्च न्यायालय में स्थानांतरित (Transfer) कर सकता है। कॉलेजियम प्रणाली के अनुसार CJI के साथ चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों की सहमति से यह प्रक्रिया संचालित होती है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 222: उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का स्थानांतरण।
- अनुच्छेद 226: उच्च न्यायालय की रिट जारी करने की शक्ति।
- अनुच्छेद 227: उच्च न्यायालय की अधीनस्थ न्यायालयों पर अधीक्षण की शक्ति।
प्रश्न 21. नेहरू ने संविधान सभा में “उद्देश्य प्रस्ताव” कब प्रस्तुत किया था ?
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सही उत्तर : (D) 13 दिसम्बर, 1946
विस्तृत व्याख्या :
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन में ’13 दिसम्बर, 1946′ को ऐतिहासिक ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ (Objective Resolution) प्रस्तुत किया था। इस प्रस्ताव में भारत को एक संप्रभु स्वतंत्र गणराज्य घोषित करने और सभी नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता की गारंटी देने की संवैधानिक रूपरेखा थी। इसे 22 जनवरी, 1947 को संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, जो आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार बना।
पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा के प्रथम अधिवेशन में ’13 दिसम्बर, 1946′ को ऐतिहासिक ‘उद्देश्य प्रस्ताव’ (Objective Resolution) प्रस्तुत किया था। इस प्रस्ताव में भारत को एक संप्रभु स्वतंत्र गणराज्य घोषित करने और सभी नागरिकों को न्याय, समानता और स्वतंत्रता की गारंटी देने की संवैधानिक रूपरेखा थी। इसे 22 जनवरी, 1947 को संविधान सभा द्वारा सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया, जो आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का आधार बना।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रस्तुत करने की तारीख: 13 दिसंबर 1946।
- स्वीकार करने की तारीख: 22 जनवरी 1947।
- प्रस्तावना का मूल: यही उद्देश्य प्रस्ताव वर्तमान संविधान की प्रस्तावना (Preamble) का मूल आधार है।
प्रश्न 22. भारतीय संविधान का 91वाँ संशोधन प्रदान करता है :
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सही उत्तर : (A) मंत्रिपरिषद् की संख्या को सीमित करना
विस्तृत व्याख्या :
’91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003′ द्वारा अनुच्छेद 75 और अनुच्छेद 164 में संशोधन करके यह तय किया गया कि केंद्र में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी, तथा राज्यों में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी (और राज्यों में न्यूनतम संख्या 12 होगी)। इसके अलावा दल-बदल कानून (10वीं अनुसूची) को भी सख्त बनाया गया।
’91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003′ द्वारा अनुच्छेद 75 और अनुच्छेद 164 में संशोधन करके यह तय किया गया कि केंद्र में केंद्रीय मंत्रिपरिषद में प्रधानमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी, तथा राज्यों में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी (और राज्यों में न्यूनतम संख्या 12 होगी)। इसके अलावा दल-बदल कानून (10वीं अनुसूची) को भी सख्त बनाया गया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अधिकतम सीमा: निचले सदन (लोकसभा/विधानसभा) के कुल सदस्यों का 15%।
- राज्यों में न्यूनतम सीमा: मुख्यमंत्री सहित न्यूनतम 12 मंत्री।
- दल-बदल प्रावधान: पूर्व में मौजूद 1/3 सदस्यों के अलग होने पर विभाजन (Split) की छूट को समाप्त कर दिया गया।
प्रश्न 23. किस अधिनियम ने प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली की स्थापना की ?
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सही उत्तर : (B) 1919 का भारत सरकार अधिनियम
विस्तृत व्याख्या :
‘भारत सरकार अधिनियम, 1919’ (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) ने ब्रिटिश भारत के प्रांतों में ‘द्वैध शासन प्रणाली’ (Dyarchy) की स्थापना की। इसके तहत प्रांतीय विषयों को दो भागों में बांटा गया था—1. आरक्षित विषय (Reserved Subjects – पुलिस, राजस्व, न्याय आदि, जो गवर्नर अपनी कार्यकारिणी के माध्यम से चलाता था), और 2. हस्तांतरित विषय (Transferred Subjects – शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय स्वशासन, जो मंत्रियों को सौंपे गए थे)।
‘भारत सरकार अधिनियम, 1919’ (मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार) ने ब्रिटिश भारत के प्रांतों में ‘द्वैध शासन प्रणाली’ (Dyarchy) की स्थापना की। इसके तहत प्रांतीय विषयों को दो भागों में बांटा गया था—1. आरक्षित विषय (Reserved Subjects – पुलिस, राजस्व, न्याय आदि, जो गवर्नर अपनी कार्यकारिणी के माध्यम से चलाता था), और 2. हस्तांतरित विषय (Transferred Subjects – शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय स्वशासन, जो मंत्रियों को सौंपे गए थे)।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- द्वैध शासन के जनक: लियोनेल कर्टिस (Lionel Curtis)।
- प्रांतों में द्वैध शासन समाप्ति: 1935 के भारत शासन अधिनियम द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर ‘प्रांतीय स्वायत्तता’ लागू की गई तथा केंद्र में द्वैध शासन प्रस्तावित किया गया।
- द्विसदनीय विधायिका: 1919 के अधिनियम द्वारा ही केंद्र में पहली बार द्विसदनीय विधायिका (राज्य परिषद व केंद्रीय विधानसभा) बनाई गई।
प्रश्न 24. किसने कहा था “संविधान सभा अकेले ही देश के लिए एक स्वदेशी संविधान का निर्माण कर सकती है तथा सही मायने में और पूरी तरह से लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर सकती है” ?
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सही उत्तर : (A) महात्मा गांधी
विस्तृत व्याख्या :
महात्मा गांधी ने 1939 में अपने प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘हरिजन’ में लिखे लेख में यह ऐतिहासिक वक्तव्य दिया था कि “संविधान सभा अकेले ही देश के लिए एक स्वदेशी संविधान का निर्माण कर सकती है तथा सही मायने में और पूरी तरह से देश के लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर सकती है।” गांधी जी ने सबसे पहले वर्ष 1922 में स्पष्ट किया था कि ‘भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छानुसार ही होगा।’
महात्मा गांधी ने 1939 में अपने प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘हरिजन’ में लिखे लेख में यह ऐतिहासिक वक्तव्य दिया था कि “संविधान सभा अकेले ही देश के लिए एक स्वदेशी संविधान का निर्माण कर सकती है तथा सही मायने में और पूरी तरह से देश के लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर सकती है।” गांधी जी ने सबसे पहले वर्ष 1922 में स्पष्ट किया था कि ‘भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छानुसार ही होगा।’
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- वर्ष 1922: महात्मा गांधी ने कहा था- ‘भारतीय संविधान भारतीयों की इच्छानुसार ही होना चाहिए।’
- वर्ष 1934: एम.एन. रॉय (मानवेंद्र नाथ रॉय) ने औपचारिक रूप से सबसे पहले संविधान सभा के गठन का विचार रखा।
- वर्ष 1935: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से संविधान सभा के गठन की मांग रखी।
MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2021 : संवैधानिक व्यवस्था कुल 22 प्रश्न
विषय 5: Constitutional System of India and MP | प्रश्न क्रमांक 1 से 22प्रश्न 1. भारत शासन अधिनियम, 1935 के तहत प्रस्तावित संघीय प्रणाली थी :
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सही उत्तर : (A) अखिल भारतीय संघ
विस्तृत व्याख्या :
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत एक ‘अखिल भारतीय संघ’ (All India Federation) की स्थापना का प्रस्ताव किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांत, मुख्य आयुक्त के प्रांत और स्वेच्छा से शामिल होने वाली देशी रियासतें शामिल होनी थीं। हालांकि, देशी रियासतों के शामिल न होने के कारण यह अखिल भारतीय संघ कभी अस्तित्व में नहीं आ सका।
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत एक ‘अखिल भारतीय संघ’ (All India Federation) की स्थापना का प्रस्ताव किया गया था, जिसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांत, मुख्य आयुक्त के प्रांत और स्वेच्छा से शामिल होने वाली देशी रियासतें शामिल होनी थीं। हालांकि, देशी रियासतों के शामिल न होने के कारण यह अखिल भारतीय संघ कभी अस्तित्व में नहीं आ सका।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रांतीय स्वायत्तता (Provincial Autonomy): 1935 के अधिनियम द्वारा प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता दी गई।
- शक्तियों का विभाजन: तीन सूचियों (संघ सूची, प्रांतीय सूची और समवर्ती सूची) में किया गया।
- अवशिष्ट शक्तियां (Residuary Powers): वायसराय/गवर्नर-जनरल को सौंपी गई थीं।
प्रश्न 2. जवाहरलाल नेहरू ने भारत की संविधान सभा की किस बैठक में उद्देश्य प्रस्ताव रखा था ?
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सही उत्तर : (D) पाँचवीं
विस्तृत व्याख्या :
संविधान सभा की आधिकारिक कार्यवाही (Constitutional Assembly Debates) के अनुसार, प्रथम सत्र के दौरान संविधान सभा की बैठकें निम्नलिखित क्रम में हुई थीं:
• प्रथम बैठक: 9 दिसंबर 1946
• द्वितीय बैठक: 10 दिसंबर 1946
• तृतीय बैठक: 11 दिसंबर 1946 (राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने)
• चतुर्थ बैठक: 12 दिसंबर 1946
• पाँचवीं बैठक: 13 दिसंबर 1946 (जिस दिन पं. नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया)।
MPPSC ने अपनी आधिकारिक उत्तर कुंजी में ‘पाँचवीं’ (Fifth Session/Sitting) विकल्प (D) को सही उत्तर मान्य किया था।
संविधान सभा की आधिकारिक कार्यवाही (Constitutional Assembly Debates) के अनुसार, प्रथम सत्र के दौरान संविधान सभा की बैठकें निम्नलिखित क्रम में हुई थीं:
• प्रथम बैठक: 9 दिसंबर 1946
• द्वितीय बैठक: 10 दिसंबर 1946
• तृतीय बैठक: 11 दिसंबर 1946 (राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष बने)
• चतुर्थ बैठक: 12 दिसंबर 1946
• पाँचवीं बैठक: 13 दिसंबर 1946 (जिस दिन पं. नेहरू ने उद्देश्य प्रस्ताव पेश किया)।
MPPSC ने अपनी आधिकारिक उत्तर कुंजी में ‘पाँचवीं’ (Fifth Session/Sitting) विकल्प (D) को सही उत्तर मान्य किया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- बैठक की तिथि: 13 दिसंबर 1946।
- स्वीकृति: 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से पारित हुआ।
- प्रस्तावना: उद्देश्य प्रस्ताव का परिवर्तित रूप ही संविधान की प्रस्तावना बना।
प्रश्न 3. संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 108 के तहत निम्नलिखित में से किसकी आवश्यकता है ?
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (A) राष्ट्रपति का आशय
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 108(1) के मूल पाठ (Bare Act) में स्पष्ट शब्दावली प्रयुक्त है कि यदि किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में गतिरोध हो, तो “राष्ट्रपति… सदनों को संदेश द्वारा या लोक अधिसूचना द्वारा संयुक्त बैठक में मिलने के लिए आहूत करने के अपने आशय की सूचना (Notify his intention to summon them to meet in a joint sitting) देगा।” अतः ‘राष्ट्रपति का आशय’ (President’s Intention) ही संवैधानिक रूप से सटीक अभिव्यक्ति है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 108(1) के मूल पाठ (Bare Act) में स्पष्ट शब्दावली प्रयुक्त है कि यदि किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में गतिरोध हो, तो “राष्ट्रपति… सदनों को संदेश द्वारा या लोक अधिसूचना द्वारा संयुक्त बैठक में मिलने के लिए आहूत करने के अपने आशय की सूचना (Notify his intention to summon them to meet in a joint sitting) देगा।” अतः ‘राष्ट्रपति का आशय’ (President’s Intention) ही संवैधानिक रूप से सटीक अभिव्यक्ति है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 108: दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (केवल साधारण विधेयक और वित्त विधेयक पर, धन विधेयक या संविधान संशोधन विधेयक पर नहीं)।
- अध्यक्षता: अनुच्छेद 118(4) के तहत संयुक्त बैठक की अध्यक्षता ‘लोकसभा अध्यक्ष’ करता है।
- अब तक: भारत में अब तक केवल 3 बार संयुक्त बैठक बुलाई गई है (दहेज निषेध 1961, बैंकिंग सेवा आयोग 1978, पोटा 2002)।
प्रश्न 4. भारतीय संसद में शामिल है :
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सही उत्तर : (C) राष्ट्रपति, राज्यसभा तथा लोकसभा
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार, संघ की संसद ‘राष्ट्रपति और दो सदनों—राज्यसभा तथा लोकसभा’ से मिलकर बनती है। राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रमुख होने के साथ-साथ संसद का एक अनिवार्य व अभिन्न अंग है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 के अनुसार, संघ की संसद ‘राष्ट्रपति और दो सदनों—राज्यसभा तथा लोकसभा’ से मिलकर बनती है। राष्ट्रपति कार्यपालिका का प्रमुख होने के साथ-साथ संसद का एक अनिवार्य व अभिन्न अंग है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 79: संसद का गठन (राष्ट्रपति + राज्यसभा + लोकसभा)।
- ब्रिटिश परंपरा: यह व्यवस्था ब्रिटिश संसद (क्राउन + हाउस ऑफ लॉर्ड्स + हाउस ऑफ कॉमन्स) के अनुरूप है।
प्रश्न 5. भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद अस्पृश्यता को समाप्त करता है ?
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (C) अनुच्छेद 17
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 17’ अस्पृश्यता (छुआछूत / Untouchability) का उन्मूलन करता है और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध करता है। अस्पृश्यता से उपजी किसी अयोग्यता को लागू करना विधि के अनुसार दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। इसके क्रियान्वयन हेतु संसद ने ‘नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955’ बनाया है।
भारतीय संविधान का ‘अनुच्छेद 17’ अस्पृश्यता (छुआछूत / Untouchability) का उन्मूलन करता है और उसका किसी भी रूप में आचरण निषिद्ध करता है। अस्पृश्यता से उपजी किसी अयोग्यता को लागू करना विधि के अनुसार दंडनीय अपराध घोषित किया गया है। इसके क्रियान्वयन हेतु संसद ने ‘नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955’ बनाया है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- पूर्ण मौलिक अधिकार: अनुच्छेद 17 एक निरपेक्ष (Absolute) अधिकार है, जिस पर कोई अपवाद नहीं है।
- अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण।
- अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध।
- अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत।
प्रश्न 6. राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति के नामों की सिफारिश करने वाली समिति में कौन शामिल है ?
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (A) विधानसभा अध्यक्ष
विस्तृत व्याख्या :
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22 के तहत समिति में मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), गृह मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं। दिए गए विकल्पों में (A) विधानसभा अध्यक्ष और (C) नेता प्रतिपक्ष दोनों ही इस समिति के सदस्य होते हैं। MPPSC की आधिकारिक उत्तर कुंजी में (A) और (C) दोनों को मान्य माना गया था।
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22 के तहत समिति में मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), गृह मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल होते हैं। दिए गए विकल्पों में (A) विधानसभा अध्यक्ष और (C) नेता प्रतिपक्ष दोनों ही इस समिति के सदस्य होते हैं। MPPSC की आधिकारिक उत्तर कुंजी में (A) और (C) दोनों को मान्य माना गया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- चयन समिति सदस्य: मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष।
- नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा चयन समिति की सिफारिश पर।
प्रश्न 7. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति कौन करता है ?
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (A) राज्यपाल
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-K (243-ट) के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त (State Election Commissioner / मुख्य चुनाव अधिकारी) की नियुक्ति संबंधित ‘राज्य के राज्यपाल’ (Governor) द्वारा की जाती है। राज्य निर्वाचन आयुक्त को पद से केवल उन्हीं आधारों और रीति से हटाया जा सकता है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए विहित हैं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243-K (243-ट) के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयुक्त (State Election Commissioner / मुख्य चुनाव अधिकारी) की नियुक्ति संबंधित ‘राज्य के राज्यपाल’ (Governor) द्वारा की जाती है। राज्य निर्वाचन आयुक्त को पद से केवल उन्हीं आधारों और रीति से हटाया जा सकता है जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए विहित हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 243-K: पंचायतों के लिए निर्वाचन आयोग एवं राज्यपाल द्वारा आयुक्त की नियुक्ति।
- अनुच्छेद 243-ZA: नगरपालिकाओं के निर्वाचन हेतु इसी राज्य निर्वाचन आयोग को शक्ति।
- कार्यकाल: मध्य प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या 66 वर्ष की आयु तक होता है।
प्रश्न 8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
i. भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर वेतन का संदाय किया जाता है।
ii. भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की दिनांक से 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले आता है, तक होगा।
iii. कोई निर्वाचन आयुक्त किसी भी समय मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा अपना पद त्याग कर सकेगा।
कौन-से कथन सत्य हैं ?
i. भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर वेतन का संदाय किया जाता है।
ii. भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की दिनांक से 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले आता है, तक होगा।
iii. कोई निर्वाचन आयुक्त किसी भी समय मुख्य निर्वाचन आयुक्त को संबोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा अपना पद त्याग कर सकेगा।
कौन-से कथन सत्य हैं ?
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (B) i तथा ii
विस्तृत व्याख्या :
कथन i सही है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान वेतन मिलता है। कथन ii भी सही है क्योंकि कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। कथन iii असत्य है क्योंकि कोई भी निर्वाचन आयुक्त अपना त्यागपत्र मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नहीं, बल्कि ‘भारत के राष्ट्रपति’ को संबोधित करके देता है। अतः केवल i तथा ii सत्य हैं।
कथन i सही है क्योंकि मुख्य चुनाव आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान वेतन मिलता है। कथन ii भी सही है क्योंकि कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। कथन iii असत्य है क्योंकि कोई भी निर्वाचन आयुक्त अपना त्यागपत्र मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नहीं, बल्कि ‘भारत के राष्ट्रपति’ को संबोधित करके देता है। अतः केवल i तथा ii सत्य हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- त्यागपत्र: निर्वाचन आयुक्त अपना त्यागपत्र ‘राष्ट्रपति’ को देते हैं।
- स्थापना: भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी (राष्ट्रीय मतदाता दिवस)।
- प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त: सुकुमार सेन।
प्रश्न 9. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में अधिकतम कितने सदस्य होंगे ?
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (B) पाँच सदस्य
विस्तृत व्याख्या :
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (सेवा की शर्तें) विनियम के अनुसार, आयोग में अध्यक्ष सहित अधिकतम कुल ‘5 सदस्य’ (अध्यक्ष + 4 सदस्य = 5) का प्रावधान है। MPPSC की आधिकारिक उत्तर कुंजी में ‘पाँच सदस्य’ को सही उत्तर मान्य किया गया था।
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (सेवा की शर्तें) विनियम के अनुसार, आयोग में अध्यक्ष सहित अधिकतम कुल ‘5 सदस्य’ (अध्यक्ष + 4 सदस्य = 5) का प्रावधान है। MPPSC की आधिकारिक उत्तर कुंजी में ‘पाँच सदस्य’ को सही उत्तर मान्य किया गया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- मुख्यालय: इंदौर (मध्य प्रदेश)।
- प्रथम अध्यक्ष: डी.वी. रेगे (1956)।
- गठन: राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा 118(3) के तहत राष्ट्रपति की अधिसूचना द्वारा 1 नवंबर 1956 को।
प्रश्न 10. नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की छुट्टी मंजूर करने या नामंजूर करने की शक्ति निहित होगी :
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (B) राष्ट्रपति में
विस्तृत व्याख्या :
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 की धारा 5 के अनुसार, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की किसी भी प्रकार की छुट्टी (Leave) को मंजूर या नामंजूर करने तथा उनके अवकाश वेतन के संबंध में निर्णय लेने की शक्ति ‘भारत के राष्ट्रपति’ में निहित है।
नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कर्तव्य, शक्तियां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 की धारा 5 के अनुसार, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की किसी भी प्रकार की छुट्टी (Leave) को मंजूर या नामंजूर करने तथा उनके अवकाश वेतन के संबंध में निर्णय लेने की शक्ति ‘भारत के राष्ट्रपति’ में निहित है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 148।
- शपथ: राष्ट्रपति द्वारा तीसरी अनुसूची के प्रारूप अनुसार दिलाई जाती है।
- संसद की लोक लेखा समिति (PAC) के ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ (Friend, Philosopher and Guide) के रूप में कार्य करता है।
प्रश्न 11. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 338 से संबंधित है :
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (A) राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
विस्तृत व्याख्या :
संविधान का अनुच्छेद 338 ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ (National Commission for Scheduled Castes – NCSC) से संबंधित है।
संविधान का अनुच्छेद 338 ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ (National Commission for Scheduled Castes – NCSC) से संबंधित है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 338: NCSC (अनुसूचित जाति आयोग)।
- अनुच्छेद 338A: NCST (अनुसूचित जनजाति आयोग)।
- अनुच्छेद 338B: NCBC (अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग)।
प्रश्न 12. सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 के अन्तर्गत निम्नलिखित में से कौन जुर्माना लगा सकता है ?
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (C) केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग
विस्तृत व्याख्या :
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) की धारा 20 के अनुसार, यदि कोई लोक सूचना अधिकारी बिना किसी युक्तियुक्त कारण के आवेदन लेने से मना करता है, जानबूझकर गलत/भ्रामक सूचना देता है या नष्ट करता है, तो ‘केन्द्रीय सूचना आयोग (CIC) या राज्य सूचना आयोग (SIC)’ उस अधिकारी पर ₹250 प्रतिदिन की दर से अधिकतम ₹25,000 तक की शास्ति (Penalty/जुर्माना) अधिरोपित कर सकते हैं।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) की धारा 20 के अनुसार, यदि कोई लोक सूचना अधिकारी बिना किसी युक्तियुक्त कारण के आवेदन लेने से मना करता है, जानबूझकर गलत/भ्रामक सूचना देता है या नष्ट करता है, तो ‘केन्द्रीय सूचना आयोग (CIC) या राज्य सूचना आयोग (SIC)’ उस अधिकारी पर ₹250 प्रतिदिन की दर से अधिकतम ₹25,000 तक की शास्ति (Penalty/जुर्माना) अधिरोपित कर सकते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- जुर्माना दर: ₹250 प्रति दिन।
- अधिकतम जुर्माना सीमा: ₹25,000।
- अनुशासनात्मक कार्रवाई: धारा 20(2) के तहत सेवा नियमों के अधीन विभागीय जांच और दंड की सिफारिश भी कर सकते हैं।
प्रश्न 13. भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक संघ के लेखाओं संबंधी अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करता है :
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (D) उपरोक्त में से कोई नहीं
विस्तृत व्याख्या :
संविधान के अनुच्छेद 151(1) के अनुसार, भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) संघ के लेखाओं संबंधी अपनी ऑडिट रिपोर्ट ‘भारत के राष्ट्रपति’ को प्रस्तुत करता है, और राष्ट्रपति उसे संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं। चूंकि विकल्पों में ‘राष्ट्रपति’ नहीं दिया गया है, अतः सही उत्तर (D) उपरोक्त में से कोई नहीं है।
संविधान के अनुच्छेद 151(1) के अनुसार, भारत का नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) संघ के लेखाओं संबंधी अपनी ऑडिट रिपोर्ट ‘भारत के राष्ट्रपति’ को प्रस्तुत करता है, और राष्ट्रपति उसे संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखवाते हैं। चूंकि विकल्पों में ‘राष्ट्रपति’ नहीं दिया गया है, अतः सही उत्तर (D) उपरोक्त में से कोई नहीं है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 151(1): संघ के लेखे राष्ट्रपति को प्रस्तुत होंगे जो उन्हें संसद के समक्ष रखवाएंगे।
- अनुच्छेद 151(2): राज्यों के लेखे संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्रस्तुत होंगे जो उन्हें राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाएंगे।
- जांच: संसद में इस रिपोर्ट की जांच लोक लेखा समिति (PAC) करती है।
प्रश्न 14. राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति की जाती है :
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सही उत्तर : (A) राज्यपाल द्वारा
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316(1) के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति संबंधित ‘राज्य के राज्यपाल’ (Governor) द्वारा की जाती है। हालांकि, उन्हें पद से हटाने का अधिकार राज्यपाल को नहीं, बल्कि अनुच्छेद 317 के तहत केवल ‘राष्ट्रपति’ को है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316(1) के अनुसार, राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति संबंधित ‘राज्य के राज्यपाल’ (Governor) द्वारा की जाती है। हालांकि, उन्हें पद से हटाने का अधिकार राज्यपाल को नहीं, बल्कि अनुच्छेद 317 के तहत केवल ‘राष्ट्रपति’ को है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- नियुक्ति: राज्यपाल द्वारा (अनुच्छेद 316(1))।
- हटाना: केवल राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर (अनुच्छेद 317)।
- कार्यकाल: 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)।
प्रश्न 15. मध्यप्रदेश के निम्नांकित राज्यपालों में से कौन भारत की संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे हैं ?
1. एच. वी. पाटस्कर 2. निरंजन नाथ वांचू 3. सत्यनारायण सिन्हा 4. के. सी. रेड्डी
कूट :
1. एच. वी. पाटस्कर 2. निरंजन नाथ वांचू 3. सत्यनारायण सिन्हा 4. के. सी. रेड्डी
कूट :
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (B) केवल 2 व 3 सही हैं
विस्तृत व्याख्या :
एच.वी. पाटस्कर (बॉम्बे से) और के.सी. रेड्डी (मैसूर से) भारत की संविधान सभा के सक्रिय सदस्य रहे थे। जबकि निरंजन नाथ वांचू (वरिष्ठ ICS अधिकारी थे) और सत्यनारायण सिन्हा संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे (सत्यनारायण सिन्हा अंतरिम संसद के सदस्य थे परंतु मूल संविधान सभा में सदस्य के रूप में निरंजन नाथ वांचू के साथ शामिल नहीं थे)। अतः 2 और 3 सही उत्तर है।
एच.वी. पाटस्कर (बॉम्बे से) और के.सी. रेड्डी (मैसूर से) भारत की संविधान सभा के सक्रिय सदस्य रहे थे। जबकि निरंजन नाथ वांचू (वरिष्ठ ICS अधिकारी थे) और सत्यनारायण सिन्हा संविधान सभा के सदस्य नहीं रहे (सत्यनारायण सिन्हा अंतरिम संसद के सदस्य थे परंतु मूल संविधान सभा में सदस्य के रूप में निरंजन नाथ वांचू के साथ शामिल नहीं थे)। अतः 2 और 3 सही उत्तर है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- एच.वी. पाटस्कर: बॉम्बे से संविधान सभा सदस्य रहे, पद्म विभूषण से सम्मानित।
- के.सी. रेड्डी: मैसूर राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री और संविधान सभा सदस्य रहे।
- मध्य प्रदेश के अन्य राज्यपाल जो संविधान सभा में रहे: डॉ. बी. पट्टाभि सीतारमैया।
प्रश्न 16. मध्यप्रदेश के निम्नांकित मुख्यमंत्रियों में से कौन अपने कार्यकाल के दौरान मध्यप्रदेश विधानसभा में सदन के नेता नहीं रहे हैं ?
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सही उत्तर : (B) गोविन्द नारायण सिंह
विस्तृत व्याख्या :
गोविन्द नारायण सिंह (1967 से 1969 तक संविद सरकार के मुख्यमंत्री) अपने मुख्यमंत्रित्व काल में मध्य प्रदेश विधानसभा में सदन के नेता नहीं थे। उन्होंने विजयाराजे सिंधिया को विधानसभा में सदन का नेता मनोनीत किया था।
गोविन्द नारायण सिंह (1967 से 1969 तक संविद सरकार के मुख्यमंत्री) अपने मुख्यमंत्रित्व काल में मध्य प्रदेश विधानसभा में सदन के नेता नहीं थे। उन्होंने विजयाराजे सिंधिया को विधानसभा में सदन का नेता मनोनीत किया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- संविद सरकार: 1967 में मध्य प्रदेश में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी थी।
- गोविन्द नारायण सिंह: बाद में बिहार के राज्यपाल भी बने थे।
- विधानसभा में सदन का नेता: सामान्यतः मुख्यमंत्री होता है, यदि वह विधानसभा का सदस्य हो।
प्रश्न 17. निम्नांकित में से कौन मध्यप्रदेश विधानसभा के सामयिक अध्यक्ष (प्रोटेम स्पीकर), अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के पद पर रहे हैं ?
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सही उत्तर : (A) रामकिशोर शुक्ला
विस्तृत व्याख्या :
श्री रामकिशोर शुक्ला मध्य प्रदेश विधानसभा के एकमात्र ऐसे वरिष्ठ राजनेता रहे हैं जिन्होंने विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष), उपाध्यक्ष (1980-1984) तथा अध्यक्ष (1984-1985) तीनों महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों को सुशोभित किया है।
श्री रामकिशोर शुक्ला मध्य प्रदेश विधानसभा के एकमात्र ऐसे वरिष्ठ राजनेता रहे हैं जिन्होंने विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर (सामयिक अध्यक्ष), उपाध्यक्ष (1980-1984) तथा अध्यक्ष (1984-1985) तीनों महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों को सुशोभित किया है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- रामकिशोर शुक्ला: शहडोल (ब्यौहारी) से कई बार विधायक रहे।
- काशीप्रसाद पाण्डे: मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रथम प्रोटेम स्पीकर (1956) तथा बाद में अध्यक्ष (1967) रहे।
- कुंजीलाल दुबे: प्रथम अध्यक्ष (1956-1967) रहे।
प्रश्न 18. मध्यप्रदेश में सरपंच और उप-सरपंच की अनुपस्थिति में ग्रामसभा की बैठक की अध्यक्षता कौन करेगा ?
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सही उत्तर : (D) इस प्रयोजन हेतु ग्रामसभा की बैठक में उपस्थित सदस्यों द्वारा निर्वाचित सम्बन्धित ग्राम पंचायत का पंच
विस्तृत व्याख्या :
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 6 के अनुसार, ग्रामसभा की बैठकों की अध्यक्षता सरपंच करता है और उसकी अनुपस्थिति में उप-सरपंच करता है। यदि सरपंच और उप-सरपंच दोनों अनुपस्थित हों, तो बैठक की अध्यक्षता उपस्थित सदस्यों में से इस प्रयोजन हेतु ‘ग्रामसभा द्वारा निर्वाचित संबंधित ग्राम पंचायत का कोई पंच’ करता है।
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 6 के अनुसार, ग्रामसभा की बैठकों की अध्यक्षता सरपंच करता है और उसकी अनुपस्थिति में उप-सरपंच करता है। यदि सरपंच और उप-सरपंच दोनों अनुपस्थित हों, तो बैठक की अध्यक्षता उपस्थित सदस्यों में से इस प्रयोजन हेतु ‘ग्रामसभा द्वारा निर्वाचित संबंधित ग्राम पंचायत का कोई पंच’ करता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- कोरम (गणपूर्ति): कुल सदस्यों का 1/10 (जिसमें कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होना अनिवार्य है)।
- ग्रामसभा की बैठकें: वर्ष में कम से कम 4 अनिवार्य बैठकें (26 जनवरी, 14 अप्रैल, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर) आयोजित होना आवश्यक हैं।
प्रश्न 19. मध्यप्रदेश में निम्नांकित में से कौन-सी जिला पंचायत की स्थायी समितियाँ है ?
1. सामान्य प्रशासन समिति 2. कृषि समिति 3. शिक्षा समिति
कूट :
1. सामान्य प्रशासन समिति 2. कृषि समिति 3. शिक्षा समिति
कूट :
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (D) 1, 2 एवं 3 सही हैं
विस्तृत व्याख्या :
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 47 के अनुसार जिला पंचायत अपने कार्यों के संपादन हेतु 5 स्थायी समितियां गठित करती है:
1. सामान्य प्रशासन समिति
2. कृषि समिति
3. शिक्षा समिति
4. संचार एवं संकर्म (संचार व निर्माण) समिति
5. सहकारिता एवं उद्योग समिति।
अतः तीनों (1, 2 एवं 3) जिला पंचायत की स्थायी समितियाँ हैं।
मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 47 के अनुसार जिला पंचायत अपने कार्यों के संपादन हेतु 5 स्थायी समितियां गठित करती है:
1. सामान्य प्रशासन समिति
2. कृषि समिति
3. शिक्षा समिति
4. संचार एवं संकर्म (संचार व निर्माण) समिति
5. सहकारिता एवं उद्योग समिति।
अतः तीनों (1, 2 एवं 3) जिला पंचायत की स्थायी समितियाँ हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- सामान्य प्रशासन समिति का पदेन सभापति: जिला पंचायत का अध्यक्ष होता है।
- शिक्षा समिति का पदेन सभापति: जिला पंचायत का उपाध्यक्ष होता है।
प्रश्न 20. भारत के संविधान के अनुच्छेद 51 क के उपबन्धों के तहत प्रयुक्त ‘पालन एवं आदर’ शब्द किससे सम्बन्धित है ?
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सही उत्तर : (A) संविधान
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(a) के मूल पाठ में लिखा है: “प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह ‘संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे'” (To abide by the Constitution and respect its ideals and institutions, the National Flag and the National Anthem)। अतः ‘पालन एवं आदर’ (Abide and Respect) शब्द ‘संविधान’ से संबंधित हैं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A(a) के मूल पाठ में लिखा है: “प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह ‘संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे'” (To abide by the Constitution and respect its ideals and institutions, the National Flag and the National Anthem)। अतः ‘पालन एवं आदर’ (Abide and Respect) शब्द ‘संविधान’ से संबंधित हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 51A(a): संविधान का पालन करना और राष्ट्रध्वज/राष्ट्रगान का आदर करना।
- अनुच्छेद 51A(c): भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की ‘रक्षा करना और उसे अक्षुण्ण रखना’ (Uphold and Protect)।
- अनुच्छेद 51A(g): प्राकृतिक पर्यावरण की ‘रक्षा और संवर्धन करना’ (Protect and Improve)।
प्रश्न 21. निम्नलिखित में से कौन-सा संविधान संशोधन पहला संवैधानिक संशोधन था, जिसे संविधान के अनुच्छेद 368 (2) के परन्तुक की अपेक्षाओं के अनुरूप राज्य विधानमण्डलों द्वारा अनुसमर्थित किया गया ?
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सही उत्तर : (C) तृतीय संविधान संशोधन, 1954
विस्तृत व्याख्या :
‘तृतीय संविधान संशोधन अधिनियम, 1954’ पहला ऐसा संवैधानिक संशोधन था जिसे अनुच्छेद 368(2) के परंतुक के अधीन कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थित (Ratified by State Legislatures) कराया गया था। इसके द्वारा 7वीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि 33 में संशोधन करके खाद्यान्न, पशु चारा, कच्चा कपास आदि के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण पर संसद को नियंत्रण शक्ति दी गई थी।
‘तृतीय संविधान संशोधन अधिनियम, 1954’ पहला ऐसा संवैधानिक संशोधन था जिसे अनुच्छेद 368(2) के परंतुक के अधीन कम से कम आधे राज्यों के विधानमंडलों द्वारा अनुसमर्थित (Ratified by State Legislatures) कराया गया था। इसके द्वारा 7वीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि 33 में संशोधन करके खाद्यान्न, पशु चारा, कच्चा कपास आदि के उत्पादन, आपूर्ति और वितरण पर संसद को नियंत्रण शक्ति दी गई थी।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रथम संशोधन (1951): संसद (अंतरिम संसद) द्वारा पारित हुआ था जिसमें राज्यों के अनुसमर्थन की आवश्यकता नहीं पड़ी थी।
- तृतीय संशोधन (1954): 7वीं अनुसूची (समवर्ती सूची) को प्रभावित करने के कारण आधे राज्यों का अनुसमर्थन अनिवार्य हुआ था।
प्रश्न 22. केन्द्र और राज्यों के बीच विवादों को तय करने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति किस अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आती है ?
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सही उत्तर : (D) मूल क्षेत्राधिकार
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 131’ के अनुसार, भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या परस्पर राज्यों के बीच उत्पन्न किसी भी कानूनी विवाद का निपटारा करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के ‘मूल/प्रारंभिक क्षेत्राधिकार’ (Original Jurisdiction) के अंतर्गत आती है। यह अनन्य (Exclusive) शक्ति है, अर्थात् ऐसे विवाद सीधे केवल सुप्रीम कोर्ट में ही सुने जा सकते हैं।
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 131’ के अनुसार, भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या परस्पर राज्यों के बीच उत्पन्न किसी भी कानूनी विवाद का निपटारा करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के ‘मूल/प्रारंभिक क्षेत्राधिकार’ (Original Jurisdiction) के अंतर्गत आती है। यह अनन्य (Exclusive) शक्ति है, अर्थात् ऐसे विवाद सीधे केवल सुप्रीम कोर्ट में ही सुने जा सकते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 131: सर्वोच्च न्यायालय की आरंभिक/मूल अधिकारिता।
- अनुच्छेद 132-134: अपीलीय क्षेत्राधिकार (दीवानी, आपराधिक, संवैधानिक)।
- अनुच्छेद 143: राष्ट्रपति को परामर्श देने की सलाहकारी अधिकारिता।
MPPSC प्रारंभिक परीक्षा 2020 : संवैधानिक व्यवस्था कुल 24 प्रश्न
विषय 5: Constitutional System of India and MP | प्रश्न क्रमांक 1 से 24प्रश्न 1. निम्नलिखित राज्यों एवं उनके संबंधित मुख्यमंत्रियों का मिलान करें, जो भारत के प्रधानमंत्री बने :
I : a. पी.वी. नरसिम्हा राव b. मोरारजी देसाई c. एच.डी. देवेगौड़ा d. चरण सिंह e. नरेंद्र मोदी
II : i. अविभाजित उत्तर प्रदेश ii. अविभाजित आंध्र प्रदेश iii. गुजरात iv. कर्नाटक v. बम्बई
कूट :
I : a. पी.वी. नरसिम्हा राव b. मोरारजी देसाई c. एच.डी. देवेगौड़ा d. चरण सिंह e. नरेंद्र मोदी
II : i. अविभाजित उत्तर प्रदेश ii. अविभाजित आंध्र प्रदेश iii. गुजरात iv. कर्नाटक v. बम्बई
कूट :
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सही उत्तर : (D) a-ii, b-v, c-iv, d-i, e-iii
विस्तृत व्याख्या :
सही सुमेलन इस प्रकार है:
• a. पी.वी. नरसिम्हा राव – ii. अविभाजित आंध्र प्रदेश (1971-1973 तक मुख्यमंत्री)
• b. मोरारजी देसाई – v. बम्बई राज्य (1952-1956 तक मुख्यमंत्री)
• c. एच.डी. देवेगौड़ा – iv. कर्नाटक (1994-1996 तक मुख्यमंत्री)
• d. चौधरी चरण सिंह – i. अविभाजित उत्तर प्रदेश (1967 और 1970 में मुख्यमंत्री)
• e. नरेंद्र मोदी – iii. गुजरात (2001-2014 तक मुख्यमंत्री)
अतः सही कूट (D) है।
सही सुमेलन इस प्रकार है:
• a. पी.वी. नरसिम्हा राव – ii. अविभाजित आंध्र प्रदेश (1971-1973 तक मुख्यमंत्री)
• b. मोरारजी देसाई – v. बम्बई राज्य (1952-1956 तक मुख्यमंत्री)
• c. एच.डी. देवेगौड़ा – iv. कर्नाटक (1994-1996 तक मुख्यमंत्री)
• d. चौधरी चरण सिंह – i. अविभाजित उत्तर प्रदेश (1967 और 1970 में मुख्यमंत्री)
• e. नरेंद्र मोदी – iii. गुजरात (2001-2014 तक मुख्यमंत्री)
अतः सही कूट (D) है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनने वाले 6 नेता: मोरारजी देसाई, चरण सिंह, वी.पी. सिंह (यूपी), पी.वी. नरसिम्हा राव, एच.डी. देवेगौड़ा और नरेंद्र मोदी।
- वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: गुजरात के 4 बार मुख्यमंत्री रहे और 2014 से भारत के प्रधानमंत्री हैं।
प्रश्न 2. भारत के सर्वोच्च न्यायालय में निम्नलिखित में से किस प्रकार के न्यायाधीश/न्यायाधीशों की नियुक्ति की जा सकती है ?
(i) तदर्थ न्यायाधीश
(ii) अतिरिक्त न्यायाधीश
कूट :
(i) तदर्थ न्यायाधीश
(ii) अतिरिक्त न्यायाधीश
कूट :
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सही उत्तर : (A) (i) सही है और (ii) गलत है
विस्तृत व्याख्या :
संविधान के अनुच्छेद 127 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में कोरम पूरा न होने पर ‘तदर्थ न्यायाधीश’ (Ad-hoc Judges) की नियुक्ति केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से की जा सकती है। जबकि ‘अतिरिक्त न्यायाधीश’ (Additional Judges) की नियुक्ति का प्रावधान केवल उच्च न्यायालयों (High Courts – अनुच्छेद 224) के लिए है, सर्वोच्च न्यायालय के लिए नहीं। अतः (i) सही है और (ii) गलत है।
संविधान के अनुच्छेद 127 के तहत सर्वोच्च न्यायालय में कोरम पूरा न होने पर ‘तदर्थ न्यायाधीश’ (Ad-hoc Judges) की नियुक्ति केवल भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से की जा सकती है। जबकि ‘अतिरिक्त न्यायाधीश’ (Additional Judges) की नियुक्ति का प्रावधान केवल उच्च न्यायालयों (High Courts – अनुच्छेद 224) के लिए है, सर्वोच्च न्यायालय के लिए नहीं। अतः (i) सही है और (ii) गलत है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 127: सर्वोच्च न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीश (Ad-hoc Judges) की नियुक्ति (उच्च न्यायालय के योग्य जज को नियुक्त किया जाता है)।
- अनुच्छेद 224: उच्च न्यायालयों में अपर और कार्यकारी (Additional and Acting) न्यायाधीशों की नियुक्ति (अधिकतम 2 वर्ष हेतु)।
प्रश्न 3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
(i) नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का कर्तव्य होगा कि वह उन सभी प्राप्तियों की लेखा परीक्षा करें, जो भारत की संचित निधि में संदेय है।
(ii) नियंत्रक-महालेखा परीक्षक को संघ या किसी राज्य के किसी कार्यालय या विभाग में रखे गए भण्डारों या स्टॉक के लेखाओं की लेखा परीक्षा करने और उनकी बाबत में रिपोर्ट देने का प्राधिकार होगा।
सही विकल्प का चुनाव कीजिये :
(i) नियंत्रक-महालेखा परीक्षक का कर्तव्य होगा कि वह उन सभी प्राप्तियों की लेखा परीक्षा करें, जो भारत की संचित निधि में संदेय है।
(ii) नियंत्रक-महालेखा परीक्षक को संघ या किसी राज्य के किसी कार्यालय या विभाग में रखे गए भण्डारों या स्टॉक के लेखाओं की लेखा परीक्षा करने और उनकी बाबत में रिपोर्ट देने का प्राधिकार होगा।
सही विकल्प का चुनाव कीजिये :
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सही उत्तर : (B) (i) तथा (ii) दोनों सत्य हैं
विस्तृत व्याख्या :
CAG (कर्तव्य, शक्तियां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 की धारा 16 के तहत नियंत्रक-महालेखा परीक्षक भारत की संचित निधि और राज्यों की संचित निधि में संदेय सभी प्राप्तियों (Receipts) की लेखा परीक्षा करता है। धारा 17 के तहत उसे सरकारी विभागों के भंडारों (Stores) और स्टॉक के लेखाओं की जांच करने का पूर्ण प्राधिकार है। अतः दोनों कथन सत्य हैं।
CAG (कर्तव्य, शक्तियां एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1971 की धारा 16 के तहत नियंत्रक-महालेखा परीक्षक भारत की संचित निधि और राज्यों की संचित निधि में संदेय सभी प्राप्तियों (Receipts) की लेखा परीक्षा करता है। धारा 17 के तहत उसे सरकारी विभागों के भंडारों (Stores) और स्टॉक के लेखाओं की जांच करने का पूर्ण प्राधिकार है। अतः दोनों कथन सत्य हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- CAG अधिनियम 1971: धारा 16 प्राप्तियों की लेखा परीक्षा और धारा 17 भंडारों व स्टॉक की लेखा परीक्षा से संबंधित है।
- अनुच्छेद 149: CAG के कर्तव्यों और शक्तियों का संविधान में उल्लेख।
प्रश्न 4. नीति आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष कौन थे ?
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सही उत्तर : (C) अरविंद पनगढ़िया
विस्तृत व्याख्या :
1 जनवरी 2015 को गठित नीति आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष भारतीय मूल के प्रख्यात अर्थशास्त्री ‘डॉ. अरविंद पनगढ़िया’ (Arvind Panagariya) थे। उन्होंने जनवरी 2015 से अगस्त 2017 तक इस पद पर कार्य किया। वर्तमान में वे 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष हैं।
1 जनवरी 2015 को गठित नीति आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष भारतीय मूल के प्रख्यात अर्थशास्त्री ‘डॉ. अरविंद पनगढ़िया’ (Arvind Panagariya) थे। उन्होंने जनवरी 2015 से अगस्त 2017 तक इस पद पर कार्य किया। वर्तमान में वे 16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- प्रथम उपाध्यक्ष: अरविंद पनगढ़िया।
- दूसरे उपाध्यक्ष: डॉ. राजीव कुमार।
- वर्तमान उपाध्यक्ष: सुमन के. बेरी।
- प्रथम सीईओ: सिंधुश्री खुल्लर।
प्रश्न 5. राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के नामों की सिफारिश करने वाली समिति में कौन शामिल नहीं है ?
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सही उत्तर : (D) राज्यपाल
विस्तृत व्याख्या :
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22 के तहत समिति में मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री और विपक्ष का नेता शामिल होते हैं। राज्यपाल इस समिति का सदस्य नहीं होता; बल्कि समिति की सिफारिश पर राज्यपाल द्वारा औपचारिक नियुक्ति आदेश जारी किए जाते हैं।
मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 22 के तहत समिति में मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा अध्यक्ष, गृह मंत्री और विपक्ष का नेता शामिल होते हैं। राज्यपाल इस समिति का सदस्य नहीं होता; बल्कि समिति की सिफारिश पर राज्यपाल द्वारा औपचारिक नियुक्ति आदेश जारी किए जाते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- चयन समिति सदस्य: 1. मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), 2. विधानसभा अध्यक्ष, 3. गृह मंत्री, 4. नेता प्रतिपक्ष।
- राज्यपाल की भूमिका: समिति की अनुशंसा पर नियुक्ति करना।
प्रश्न 6. राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण के किसी भी निर्णय से व्यथित कोई व्यक्ति सर्वोच्च न्यायालय में अपील कितने दिन के भीतर दायर कर सकता है ?
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सही उत्तर : (D) नब्बे दिन
विस्तृत व्याख्या :
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम, 2010 (NGT Act) की धारा 22 के अनुसार, एनजीटी (NGT) के किसी भी पंचाट, निर्णय या आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति निर्णय की संसूचना की तारीख से ’90 दिन’ (Ninety Days) के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है।
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम, 2010 (NGT Act) की धारा 22 के अनुसार, एनजीटी (NGT) के किसी भी पंचाट, निर्णय या आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति निर्णय की संसूचना की तारीख से ’90 दिन’ (Ninety Days) के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- NGT स्थापना: 18 अक्टूबर 2010 (अनुच्छेद 21 के तहत स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार के क्रियान्वयन हेतु)।
- मुख्यालय: नई दिल्ली (4 क्षेत्रीय पीठें: भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई)।
- निपटारा समय: मामलों का निपटारा 6 माह के भीतर करने का अधिदेश।
प्रश्न 7. राज्य खाद्य आयोग की स्थापना किस कानून के अन्तर्गत होती है ?
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सही उत्तर : (A) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013
विस्तृत व्याख्या :
राज्य खाद्य आयोग (State Food Commission) की स्थापना ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ (NFSA, 2013) की धारा 16 के प्रावधानों के तहत की जाती है।
राज्य खाद्य आयोग (State Food Commission) की स्थापना ‘राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013’ (NFSA, 2013) की धारा 16 के प्रावधानों के तहत की जाती है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अधिनियम: NFSA, 2013।
- संरचना: 1 अध्यक्ष, 5 सदस्य और 1 सदस्य सचिव।
- मध्य प्रदेश राज्य खाद्य आयोग: 21 जुलाई 2017 को गठित हुआ।
प्रश्न 8. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये :
(i) भारत के निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर वेतन का संदाय किया जाता है।
(ii) भारत के निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले आता है, तक होगा।
(iii) एक चुनाव आयुक्त, किसी भी समय मुख्य चुनाव आयुक्त को सम्बोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा, अपना पद त्याग दे सकते हैं।
सही कथन का चयन कीजिए।
(i) भारत के निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन के बराबर वेतन का संदाय किया जाता है।
(ii) भारत के निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु, जो भी पहले आता है, तक होगा।
(iii) एक चुनाव आयुक्त, किसी भी समय मुख्य चुनाव आयुक्त को सम्बोधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा, अपना पद त्याग दे सकते हैं।
सही कथन का चयन कीजिए।
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सही उत्तर : (A) (i) तथा (ii)
विस्तृत व्याख्या :
कथन (i) और (ii) सत्य हैं। कथन (iii) असत्य है क्योंकि निर्वाचन आयुक्त अपना त्यागपत्र मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रपति’ को देते हैं।
कथन (i) और (ii) सत्य हैं। कथन (iii) असत्य है क्योंकि निर्वाचन आयुक्त अपना त्यागपत्र मुख्य निर्वाचन आयुक्त को नहीं, बल्कि ‘राष्ट्रपति’ को देते हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- वेतन: सुप्रीम कोर्ट जज के समान (₹2.5 लाख/माह)।
- कार्यकाल: 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक।
- इस्तीफा: राष्ट्रपति को संबोधित।
प्रश्न 9. भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की किस सूची एवं प्रविष्टि का संबंध राज्य के विधान मंडल के निर्वाचन से है ?
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सही उत्तर : (C) सूची – II, प्रविष्टि 37
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की ‘सूची-II (राज्य सूची) की प्रविष्टि 37’ का संबंध संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ‘राज्य के विधान-मंडल के निर्वाचनों’ (Elections to the Legislature of the State) से है। (नोट: सूची-I की प्रविष्टि 72 संसद, राज्य विधानमंडल और राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति चुनावों के सामान्य संसद के अधिकारों से संबंधित है, परंतु राज्य सूची की विशिष्ट प्रविष्टि 37 राज्य विधानमंडल निर्वाचन से संबंधित है)।
भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की ‘सूची-II (राज्य सूची) की प्रविष्टि 37’ का संबंध संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के उपबंधों के अधीन रहते हुए ‘राज्य के विधान-मंडल के निर्वाचनों’ (Elections to the Legislature of the State) से है। (नोट: सूची-I की प्रविष्टि 72 संसद, राज्य विधानमंडल और राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति चुनावों के सामान्य संसद के अधिकारों से संबंधित है, परंतु राज्य सूची की विशिष्ट प्रविष्टि 37 राज्य विधानमंडल निर्वाचन से संबंधित है)।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- सूची II प्रविष्टि 37: राज्य विधानमंडल के निर्वाचन।
- सूची I प्रविष्टि 72: संसद, राज्य विधानमंडल और राष्ट्रपति/उपराष्ट्रपति निर्वाचन के लिए सामान्य कानून बनाने की केंद्रीय शक्ति।
- अनुच्छेद 328: राज्य विधानमंडल को अपने चुनावों के संबंध में उपबंध करने की शक्ति।
प्रश्न 10. मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का गठन किया गया :
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सही उत्तर : (A) 1 फरवरी, 1994
विस्तृत व्याख्या :
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का गठन ‘1 फरवरी, 1994’ को राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना द्वारा किया गया था।
मध्य प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग का गठन ‘1 फरवरी, 1994’ को राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना द्वारा किया गया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- गठन तिथि: 1 फरवरी 1994।
- प्रथम आयुक्त: एन.बी. लोहानी।
- संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 243-K और अनुच्छेद 243-ZA।
प्रश्न 11. दो या अधिक राज्यों के लिए एक संयुक्त राज्य लोकसेवा आयोग की स्थापना की जा सकती हैं :
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सही उत्तर : (C) (A) तथा (B) दोनों
विस्तृत व्याख्या :
संविधान के अनुच्छेद 315(2) के अनुसार, यदि दो या अधिक राज्य यह करार (Agreement) करते हैं कि उनके लिए एक ही संयुक्त लोक सेवा आयोग (Joint State Public Service Commission – JSPSC) होगा, और उस आशय का संकल्प प्रत्येक संबंधित राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित कर दिया जाता है, तो ‘संसद विधि द्वारा’ उस आवश्यकता की पूर्ति के लिए संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग की स्थापना कर सकेगी। अतः (A) और (B) दोनों अनिवार्य शर्तें हैं।
संविधान के अनुच्छेद 315(2) के अनुसार, यदि दो या अधिक राज्य यह करार (Agreement) करते हैं कि उनके लिए एक ही संयुक्त लोक सेवा आयोग (Joint State Public Service Commission – JSPSC) होगा, और उस आशय का संकल्प प्रत्येक संबंधित राज्य के विधानमंडल द्वारा पारित कर दिया जाता है, तो ‘संसद विधि द्वारा’ उस आवश्यकता की पूर्ति के लिए संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग की स्थापना कर सकेगी। अतः (A) और (B) दोनों अनिवार्य शर्तें हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- सांविधिक निकाय: संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग एक सांविधिक निकाय (संसद की विधि द्वारा निर्मित) होता है, न कि प्रत्यक्ष संवैधानिक निकाय।
- सदस्यों की नियुक्ति: JSPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति ‘राष्ट्रपति’ द्वारा की जाती है।
- त्यागपत्र व हटाना: राष्ट्रपति को त्यागपत्र देते हैं और राष्ट्रपति द्वारा ही हटाए जाते हैं।
प्रश्न 12. किस प्रावधान के अंतर्गत मध्य प्रदेश लोकसेवा आयोग का गठन किया गया है ?
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सही उत्तर : (B) राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 118(3)
विस्तृत व्याख्या :
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) का गठन ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 118(3)’ के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से 1 नवंबर 1956 को किया गया था।
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) का गठन ‘राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 की धारा 118(3)’ के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से 1 नवंबर 1956 को किया गया था।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- धारा 118(3): राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की यह धारा नवगठित मध्य प्रदेश के लिए लोक सेवा आयोग की स्थापना का आधार बनी।
- प्रथम परीक्षा: MPPSC ने अपनी पहली प्रतियोगी परीक्षा वर्ष 1958 में आयोजित की थी।
- मुख्यालय: इंदौर।
प्रश्न 13. 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम द्वारा कितने राज्य और संघीय क्षेत्रों की स्थापना की गई ?
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सही उत्तर : (A) 14 राज्य, 6 संघीय क्षेत्र
विस्तृत व्याख्या :
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (7वां संविधान संशोधन) द्वारा भारत में राज्यों के चार-स्तरीय विभाजन (भाग A, B, C, D) को समाप्त कर ’14 राज्य और 6 संघीय क्षेत्र’ (केंद्र-शासित प्रदेश) स्थापित किए गए थे।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (7वां संविधान संशोधन) द्वारा भारत में राज्यों के चार-स्तरीय विभाजन (भाग A, B, C, D) को समाप्त कर ’14 राज्य और 6 संघीय क्षेत्र’ (केंद्र-शासित प्रदेश) स्थापित किए गए थे।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- स्थापना: 1 नवंबर 1956।
- संख्या: 14 राज्य + 6 संघ राज्य क्षेत्र।
- फजल अली आयोग: 1953 में गठित 3-सदस्यीय आयोग।
प्रश्न 14. भारतीय रियासतों के शासकों के विशेष अधिकारों और प्रिवी पर्सों की समाप्ति कब की गई ?
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सही उत्तर : (D) 1971
विस्तृत व्याख्या :
पूर्व देशी रियासतों के राजा-महाराजाओं को मिलने वाले विशेषाधिकारों और निजी थैलियों (प्रिवी पर्स – Privy Purses) को इंदिरा गांधी सरकार द्वारा पारित ’26वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971′ द्वारा पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 291 और 362 को निरस्त कर दिया गया तथा नया अनुच्छेद 363-A जोड़ा गया।
पूर्व देशी रियासतों के राजा-महाराजाओं को मिलने वाले विशेषाधिकारों और निजी थैलियों (प्रिवी पर्स – Privy Purses) को इंदिरा गांधी सरकार द्वारा पारित ’26वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971′ द्वारा पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 291 और 362 को निरस्त कर दिया गया तथा नया अनुच्छेद 363-A जोड़ा गया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- 26वां संविधान संशोधन 1971: प्रिवी पर्स और राजाओं के विशेष अधिकारों की समाप्ति।
- माधवराव सिंधिया वाद (1970): सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश को रद्द किए जाने के बाद संसद ने 26वां संविधान संशोधन पारित किया।
प्रश्न 15. भारत शासन अधिनियम, 1919 के अंतर्गत भारतीय विधायिका का अंतिम निर्वाचन किस वर्ष में आयोजित किया गया था ?
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सही उत्तर : (C) 1945
विस्तृत व्याख्या :
भारत सरकार अधिनियम, 1919 के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्रीय विधान सभा (Central Legislative Assembly) का अंतिम आम चुनाव वर्ष ‘1945’ (अक्टूबर-दिसंबर 1945) में आयोजित किया गया था। इसके बाद इसी निर्वाचित केंद्रीय विधायिका ने आगे चलकर अंतरिम संसद के रूप में कार्य किया।
भारत सरकार अधिनियम, 1919 के प्रावधानों के अंतर्गत केंद्रीय विधान सभा (Central Legislative Assembly) का अंतिम आम चुनाव वर्ष ‘1945’ (अक्टूबर-दिसंबर 1945) में आयोजित किया गया था। इसके बाद इसी निर्वाचित केंद्रीय विधायिका ने आगे चलकर अंतरिम संसद के रूप में कार्य किया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- 1945 चुनाव: केंद्रीय विधानसभा का अंतिम चुनाव ब्रिटिश काल में इसी अधिनियम के तहत हुआ।
- प्रथम चुनाव: 1919 के अधिनियम के तहत पहला चुनाव 1920 में हुआ था।
प्रश्न 16. संविधान सभा के प्रथम मनोनीत उप-सभापति कौन थे ?
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सही उत्तर : (D) फ्रेन्क एंथोनी
विस्तृत व्याख्या :
9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में जब डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी सभापति बनाया गया था, तब उन्होंने एंग्लो-इंडियन नेता ‘फ्रैंक एंथोनी’ (Frank Anthony) को संविधान सभा का प्रथम मनोनीत उप-सभापति (Nominated Deputy Chairman) नियुक्त किया था। बाद में 11 दिसंबर 1946 को एच.सी. मुखर्जी को औपचारिक रूप से निर्वाचित उप-सभापति चुना गया।
9 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक में जब डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को अस्थायी सभापति बनाया गया था, तब उन्होंने एंग्लो-इंडियन नेता ‘फ्रैंक एंथोनी’ (Frank Anthony) को संविधान सभा का प्रथम मनोनीत उप-सभापति (Nominated Deputy Chairman) नियुक्त किया था। बाद में 11 दिसंबर 1946 को एच.सी. मुखर्जी को औपचारिक रूप से निर्वाचित उप-सभापति चुना गया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- फ्रैंक एंथोनी: जबलपुर (मध्य प्रदेश) में जन्मे प्रमुख एंग्लो-इंडियन नेता और शिक्षाविद।
- एच.सी. मुखर्जी: संविधान सभा के प्रथम निर्वाचित उपाध्यक्ष (11 दिसंबर 1946)।
- वी.टी. कृष्णामाचारी: संविधान सभा के दूसरे निर्वाचित उपाध्यक्ष (जुलाई 1947 में चुने गए)।
प्रश्न 17. निम्न में से कौन-सी अभिव्यक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 108 के अंतर्गत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आहूत करने की सूचना के संबंध में उचित है ?
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सही उत्तर : (A) राष्ट्रपति का आशय
विस्तृत व्याख्या :
अनुच्छेद 108(1) के अनुसार राष्ट्रपति संयुक्त बैठक आहूत करने के अपने ‘आशय’ (Intention) की अधिसूचना जारी करता है।
अनुच्छेद 108(1) के अनुसार राष्ट्रपति संयुक्त बैठक आहूत करने के अपने ‘आशय’ (Intention) की अधिसूचना जारी करता है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- संवैधानिक शब्द: ‘Notify his intention to summon them’ (अपने आशय की सूचना)।
- अध्यक्षता: लोकसभा अध्यक्ष द्वारा।
प्रश्न 18. भारत के संविधान का अनुच्छेद 24 जोखिमपूर्ण कार्यों से संबंधित कारखानों में बालकों के नियोजन को निषेध करता है। ऐसा निषेध है :
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सही उत्तर : (A) पूर्ण निषेध
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 24 के अनुसार: “14 वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा या किसी अन्य परिसंकटमय (जोखिमपूर्ण) नियोजन में नहीं लगाया जाएगा।” यह एक ‘पूर्ण निषेध’ (Absolute Prohibition) है, जिसमें किसी भी प्रकार की छूट या अपवाद की अनुमति नहीं है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 24 के अनुसार: “14 वर्ष से कम आयु के किसी बालक को किसी कारखाने या खान में काम करने के लिए नियोजित नहीं किया जाएगा या किसी अन्य परिसंकटमय (जोखिमपूर्ण) नियोजन में नहीं लगाया जाएगा।” यह एक ‘पूर्ण निषेध’ (Absolute Prohibition) है, जिसमें किसी भी प्रकार की छूट या अपवाद की अनुमति नहीं है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 24: बाल श्रम का पूर्ण प्रतिषेध (Absolute Bar)।
- बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) संशोधन अधिनियम 2016: 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सभी व्यवसायों में नियोजन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है।
प्रश्न 19. भारत के संविधान के अनुच्छेद 368 के संबंध में कौन-सा कथन सही है ?
(i) 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 के द्वारा अनुच्छेद 368 संशोधित किया गया था।
(ii) 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के द्वारा अनुच्छेद 368 संशोधित किया गया था।
कूट :
(i) 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 के द्वारा अनुच्छेद 368 संशोधित किया गया था।
(ii) 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 के द्वारा अनुच्छेद 368 संशोधित किया गया था।
कूट :
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सही उत्तर : (C) (i) एवं (ii) दोनों सही हैं
विस्तृत व्याख्या :
दोनों कथन सत्य हैं:
1. 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 368 के शीर्षक में परिवर्तन कर ‘संविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया’ किया गया तथा राष्ट्रपति के लिए संशोधन विधेयक पर अनुमति देना बाध्यकारी बनाया गया।
2. 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 (GST) द्वारा अनुच्छेद 368 के परंतुक के खंड (ग) में ‘अनुच्छेद 279A’ को शामिल करने हेतु अनुच्छेद 368 को संशोधित किया गया था।
अतः (i) एवं (ii) दोनों सही हैं।
दोनों कथन सत्य हैं:
1. 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा अनुच्छेद 368 के शीर्षक में परिवर्तन कर ‘संविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसके लिए प्रक्रिया’ किया गया तथा राष्ट्रपति के लिए संशोधन विधेयक पर अनुमति देना बाध्यकारी बनाया गया।
2. 101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016 (GST) द्वारा अनुच्छेद 368 के परंतुक के खंड (ग) में ‘अनुच्छेद 279A’ को शामिल करने हेतु अनुच्छेद 368 को संशोधित किया गया था।
अतः (i) एवं (ii) दोनों सही हैं।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- 24वां संशोधन 1971: गोलकनाथ फैसले के प्रभाव को समाप्त करने के लिए किया गया।
- 101वां संशोधन 2016: जीएसटी परिषद (अनुच्छेद 279A) को संघीय ढांचे का अंग मानते हुए अनुच्छेद 368 के परंतुक में शामिल किया गया।
प्रश्न 20. मध्य प्रदेश के निम्नांकित राज्यपालों में से कौन हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे हैं ?
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सही उत्तर : (D) डॉ. भगवत दयाल शर्मा
विस्तृत व्याख्या :
डॉ. भगवत दयाल शर्मा (पंडितजी) 1966 में नवगठित ‘हरियाणा राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री’ बने थे। बाद में उन्होंने 1980 से 1984 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।
डॉ. भगवत दयाल शर्मा (पंडितजी) 1966 में नवगठित ‘हरियाणा राज्य के प्रथम मुख्यमंत्री’ बने थे। बाद में उन्होंने 1980 से 1984 तक मध्य प्रदेश के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- हरियाणा के प्रथम मुख्यमंत्री: भगवत दयाल शर्मा (1966-1967)।
- मध्य प्रदेश के राज्यपाल: 1980 से 1984 तक।
- राम नरेश यादव: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (1977-1979) रहे थे और बाद में मध्य प्रदेश के राज्यपाल (2011-2016) बने।
- राम प्रकाश गुप्ता: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे और बाद में मध्य प्रदेश के राज्यपाल बने (पद पर रहते हुए निधन)।
प्रश्न 21. मध्य प्रदेश के निम्नलिखित मुख्यमंत्रियों में से कौन मध्य प्रदेश विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर नहीं रहे हैं ?
1. दिग्विजय सिंह 2. मोतीलाल वोरा 3. वीरेन्द्र कुमार सखलेचा 4. श्यामाचरण शुक्ल
कूट :
1. दिग्विजय सिंह 2. मोतीलाल वोरा 3. वीरेन्द्र कुमार सखलेचा 4. श्यामाचरण शुक्ल
कूट :
👁️ उत्तर एवं व्याख्या देखें
सही उत्तर : (A) केवल 1 और 2 सही हैं
विस्तृत व्याख्या :
दिग्विजय सिंह और मोतीलाल वोरा दोनों कभी भी मध्य प्रदेश विधानसभा में ‘नेता प्रतिपक्ष’ (Leader of Opposition) नहीं रहे। जबकि वीरेन्द्र कुमार सखलेचा और श्यामाचरण शुक्ल दोनों मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर रह चुके हैं। अतः कूट (A) केवल 1 और 2 सही है।
दिग्विजय सिंह और मोतीलाल वोरा दोनों कभी भी मध्य प्रदेश विधानसभा में ‘नेता प्रतिपक्ष’ (Leader of Opposition) नहीं रहे। जबकि वीरेन्द्र कुमार सखलेचा और श्यामाचरण शुक्ल दोनों मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर रह चुके हैं। अतः कूट (A) केवल 1 और 2 सही है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- दिग्विजय सिंह: 10 वर्षों तक (1993-2003) मुख्यमंत्री रहे, कभी नेता प्रतिपक्ष नहीं रहे।
- मोतीलाल वोरा: दो बार मुख्यमंत्री रहे और बाद में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बने, कभी नेता प्रतिपक्ष नहीं रहे।
- श्यामाचरण शुक्ल: मुख्यमंत्री के साथ-साथ 1990-1992 में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।
प्रश्न 22. मध्य प्रदेश विधान सभा की कार्यवाही का सही क्रम चुनें :
1. निधन सम्बन्धी उल्लेख 2. राज्यपाल का अभिभाषण 3. शपथ या प्रतिज्ञान 4. मंत्रियों का परिचय
कूट :
1. निधन सम्बन्धी उल्लेख 2. राज्यपाल का अभिभाषण 3. शपथ या प्रतिज्ञान 4. मंत्रियों का परिचय
कूट :
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सही उत्तर : (B) 3, 2, 4, 1
विस्तृत व्याख्या :
मध्य प्रदेश विधानसभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के अनुसार, नई विधानसभा के गठन के पश्चात प्रथम सत्र की कार्यवाही का मानक औपचारिक क्रम इस प्रकार होता है:
1. नवनिर्वाचित सदस्यों द्वारा ‘शपथ या प्रतिज्ञान’ (Oath or Affirmation) – (3)
2. ‘राज्यपाल का अभिभाषण’ (Governor’s Address) – (2)
3. सदन के नेता द्वारा नए ‘मंत्रियों का परिचय’ (Introduction of Ministers) – (4)
4. ‘निधन सम्बन्धी उल्लेख’ (Obituary References) – (1)
अतः सही क्रम 3, 2, 4, 1 है।
मध्य प्रदेश विधानसभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के अनुसार, नई विधानसभा के गठन के पश्चात प्रथम सत्र की कार्यवाही का मानक औपचारिक क्रम इस प्रकार होता है:
1. नवनिर्वाचित सदस्यों द्वारा ‘शपथ या प्रतिज्ञान’ (Oath or Affirmation) – (3)
2. ‘राज्यपाल का अभिभाषण’ (Governor’s Address) – (2)
3. सदन के नेता द्वारा नए ‘मंत्रियों का परिचय’ (Introduction of Ministers) – (4)
4. ‘निधन सम्बन्धी उल्लेख’ (Obituary References) – (1)
अतः सही क्रम 3, 2, 4, 1 है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- सही क्रम: शपथ या प्रतिज्ञान ➔ राज्यपाल का अभिभाषण ➔ मंत्रियों का परिचय ➔ निधन सम्बन्धी उल्लेख।
- संविधान का अनुच्छेद 176: राज्यपाल का विशेष अभिभाषण (प्रत्येक नए चुनाव के बाद पहले सत्र और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में)।
प्रश्न 23. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के निम्नांकित मुख्य न्यायमूर्तियों में से कौन भारत के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश नहीं रहे हैं ?
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सही उत्तर : (C) न्यायमूर्ति एस. के. झा
विस्तृत व्याख्या :
न्यायमूर्ति सुशील कुमार झा (एस. के. झा) 1989 से 1993 तक मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे, परंतु वे कभी भी भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में न्यायाधीश नहीं बने। जबकि न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक, न्यायमूर्ति आर.वी. रवींद्रन और न्यायमूर्ति ए.के. माथुर तीनों मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहने के बाद उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत हुए थे।
न्यायमूर्ति सुशील कुमार झा (एस. के. झा) 1989 से 1993 तक मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे, परंतु वे कभी भी भारत के उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में न्यायाधीश नहीं बने। जबकि न्यायमूर्ति ए.के. पटनायक, न्यायमूर्ति आर.वी. रवींद्रन और न्यायमूर्ति ए.के. माथुर तीनों मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहने के बाद उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत हुए थे।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- न्यायमूर्ति एस.के. झा: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रहे (अक्टूबर 1989 से नवंबर 1993)।
- न्यायमूर्ति ए.के. माथुर: सुप्रीम कोर्ट जज रहे और बाद में 7वें वेतन आयोग के अध्यक्ष बने।
- मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति एम. हिदायतुल्ला (जो भारत के मुख्य न्यायाधीश, उपराष्ट्रपति और कार्यवाहक राष्ट्रपति भी बने)।
प्रश्न 24. मध्य प्रदेश में नगरपालिकाओं में अनुसूचित जनजातियों हेतु स्थानों के आरक्षण का प्रावधान भारत के संविधान के निम्नांकित में से किस अनुच्छेद के अन्तर्गत किया गया है ?
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सही उत्तर : (A) 243 न (1)
विस्तृत व्याख्या :
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 243T(1)’ [हिंदी में अनुच्छेद 243 न (1)] के अंतर्गत नगरपालिकाओं में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में स्थानों के आरक्षण का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान किया गया है।
भारतीय संविधान के ‘अनुच्छेद 243T(1)’ [हिंदी में अनुच्छेद 243 न (1)] के अंतर्गत नगरपालिकाओं में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में स्थानों के आरक्षण का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान किया गया है।
📌 परीक्षापयोगी महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Facts):
- अनुच्छेद 243T (अनुच्छेद 243 न): नगरपालिकाओं में स्थानों का आरक्षण (SC, ST और महिलाएं)।
- अनुच्छेद 243T(3): नगरपालिकाओं में कम से कम 1/3 स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित (मध्य प्रदेश में 50% आरक्षण)।
- पंचायतों में आरक्षण: अनुच्छेद 243D (अनुच्छेद 243 घ) में पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है।