मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission)


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

– स्थापना : 12 अक्टूबर 1993 (केन्द्र द्वारा)
– मुख्यालय : नई दिल्ली
– एक सांविधिक निकाय (ना कि संवैधानिक) – क्योंकि इसका गठन संसद में पारित अधिनियम (मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993) के अन्तर्गत हुआ था

संबंधित अधिनियम:
– मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993
– मानवाधिकार संशोधन अधिनियम, 2006
– मानवाधिकार संसोधन अधिनियम, 2019

– संबंधित समिति : ए एम अहमदी समिति

संरचना : 1 अध्यक्ष + 5 नियुक्त सदस्य + 7 पदेन सदस्य

अध्यक्ष भारत के उच्चतम न्यायालय का कोई सेनानिवृत्त न्यायधीश होना चाहिए

नियुक्त सदस्य :
– एक उच्चतम न्यायालय में कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त न्यायाधीश
– एक उच्च न्यायालय का कार्यरत या सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश 
– तीन अन्य व्यक्तियों को मानवाधिकार से संबंधित जानकारी अथवा कार्यानुभव होना चाहिए जिसमें कम से कम 1 महिला होनी चाहिए

पदेन सदस्य :
राष्ट्रीय अल्प संख्यक आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति तथा महिला आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग, राष्ट्रीय दिव्यांग जन आयोग के अध्यक्ष

इनमे से अंतिम तीन को वर्ष 2019 के बाद जोड़ा गया है

प्रथम अध्यक्ष : रंगनाथ मिश्रा
वर्तमान अध्यक्ष : जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा (पूर्व अध्यक्ष – एच एल दत्तू)
प्रथम महिला सदस्य : फातिमा बीबी
अभी तक कोई भी महिला इसका अध्यक्ष नहीं बनी है

अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति : राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गठित 6 सदस्यों की समिति की सिफारिश पर होती है
-समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, राज्य सभा के उप सभापति, संसद के दोनों सदनों के मुख्य विपक्षी दल के नेता और गृहमंत्री होते हैं
– इसके अलावा भारत के मुख्य न्यायाधीश अथवा उच्च न्यायालय के किसी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति हो सकती है

अध्यक्ष तथा सदस्यों का कार्यकाल : 3 वर्ष अथवा 70 वर्ष आयु (जो भी पहले हो)

अध्यक्ष कार्यकाल के बाद पुनः नियुक्ति के लिए योग्य होता है

कार्यकाल के बाद आयोग के अध्यक्ष व सदस्य केन्द्र सरकार अथवा राज्य सरकार में किसी भी पद के योग्य नहीं होता है

त्यागपत्र : राष्ट्रपति को

पद से हटाना :

  • राष्ट्रपति द्वारा दिवालिया, मानसिक या शारीरिक अक्षमता, किसी अपराध का दोषी,  दुराचरण या अपने कार्यकाल के दौरान अपने कार्यक्षेत्र से बाहर की रोजगार में संलिप्तता के कारण
  • दुराचरण या अक्षमता के मामले में राष्ट्रपति इस विषय को उच्चतम न्यायालय में जांच के लिए सौंपता है

आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्तों का निर्धारण केंद्रीय सरकार द्वारा किया जाता है

आयोग के कार्य :

  • मानवाधिकार के उल्लंघन की जांच करना
  • मानवाधिकार की रक्षा हेतु बनाए गए संवैधानिक व विधिक उपबंधों की समीक्षा करना 
  • न्यायालय में लंबित किसी मानवाधिकार से संबंधित कार्यवाही में हस्तक्षेप करना
  • जेलों में जाकर वहां की स्थिति का अध्ययन करना मानवाधिकार संबंधी अन्तर्राष्ट्रीय संधियों और दस्तावेजों का अध्ययन
  • मानवाधिकार के क्षेत्र में शोध करना
  • लोगों के बीच मानवाधिकारों की जानकारी फैलाना
  • मानवाधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत गैर सरकारी संगठनों के प्रयासों की सराहना करना

आयोग की शक्तियां :

  • आयोग के पास सिविल न्यायालय जैसे सभी अधिकार और शक्तियां है तथा इसका चरित भी न्यायिक है
  • आयोग केन्द्र तथा राज्य सरकार से किसी भी जानकारी अथवा रिपोर्ट मांग सकता है
  • आयोग केन्द्र अथवा राज्य सरकारों की किसी भी अधिकारी या जांच एजेंसी की सेवाएं ले सकता है
  • आयोग पीड़ित व्यक्ति को क्षतिपूर्ति के भुगतान के लिए संबंधित सरकार को सिफारिश कर सकता है
  • आयोग दोषी लोक सेवक के विरूद्ध बंदीकरण हेतु कार्यवाही प्रारंभ करने के लिए सरकार को सिफारिश कर सकता है

उपरोक्त बिंदुओं से यह स्पष्ट है कि आयोग का कार्य सिर्फ सिफारिश या सलाहकार का होता है। आयोग के पास दोषी को दण्ड देने का अधिकार नहीं होता है।

आयोग पीड़ित को किसी प्रकार की सहायता जैसे – आर्थिक सहायता नहीं दे सकता है।

आयोग की सिफारिशें संबंधित सरकार य अधिकारी पर बाध्य नहीं है।

सशस्त्र बल के सदस्य द्वारा किए गए मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में आयोग की भूमिका, शक्तियां व न्यायिकता सीमित है।

आयोग अपनी वार्षिक अथवा विशेष रिपोर्ट केन्द्र सरकार व संबंधित राज्य सरकार को भेजता है जिसे संबंधित विधायिका के समक्ष रखा जाता है।

प्रमुख बिंदु :

  • आयोग का महासचिव भारत सरकार के सचिव की रैंक का होगा
  • मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य भारतीय दण्ड संहिता की धारा 21 के तहत लोक सेवक समझे जाते हैं
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राज्य मानवाधिकार आयोग को अनुदान क्रमशः केन्द्र तथा राज्य सरकार देती है
  • राष्ट्रीय तथा राज्य मानवाधिकार आयोग उन मामलों की जांच नहीं कर सकते हो एक वर्ष से अधिक पुराने हो
  • केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार क्रमशः राष्ट्रीय तथा राज्य मानवाधिकार आयोग के लिए नियम बनाती है
  • अधिनियम के तहत बनाया गया प्रत्येक नियम संसद के प्रत्येक सदन में जब वह सत्र में हो कुल 30 दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा

मानवाधिकार संशोधन अधिनियम 2019 के प्रमुख बिंदु :

  • इस संशोधन विधेयक के तहत आयोग के अध्यक्ष के रूप में ऐसे व्यक्ति को भी नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा है।
  • आयोग के सदस्यों की संख्या को दो से बढ़ाकर तीन किया जा सके, जिनमें से एक महिला सदस्य होगी।
  • इस संशोधन के तहत राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष और दिव्यांगजनों सम्बन्धी मुख्य आयुक्त को आयोग के सदस्यों के रूप में सम्मिलित किया जा सकेगा।
  • आयोग और राज्य आयोगों के अध्यक्षों और सदस्यों की पदावधि को पांच वर्ष से कम करके तीन वर्ष किया जा सके और वे पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र होंगे।

राज्य मानवाधिकार आयोग :

गठन : मानवाधिकार अधिनियम 1993 की धारा 21 के तहत राज्य सरकार द्वारा

संरचना : 1 अध्यक्ष + 2 सदस्य + सचिव

  • अध्यक्ष : किसी उच्च न्यायालय का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायधीश
  • सदस्य :
    – एक उच्च न्यायालय का वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश 
    – दूसरा 7 वर्षों के अनुभव वाला जिला न्यायाधीश या मानवाधिकार विशेषज्ञ

अध्यक्ष तथा सदस्यों की नियुक्ति : राज्यपाल द्वारा एक समिति की सिफारिश पर

समिति के सदस्य – 

  • मुख्यमंत्री
  • विधानसभा अध्यक्ष
  • विधानसभा तथा विधान परिषद के विपक्ष का नेता
  • विधान परिषद का सभापति
  • गृहमंत्री

कार्यकाल : 3 वर्ष या 70 वर्ष (जो भी पहले)

त्यागपत्र : राज्यपाल को

पद से हटाना : राष्ट्रपति द्वारा (ना की राज्यपाल द्वारा)

  • राष्ट्रपति द्वारा दिवालिया, मानसिक या शारीरिक अक्षमता, किसी अपराध का दोषी,  दुराचरण या अपने कार्यकाल के दौरान अपने कार्यक्षेत्र से बाहर की रोजगार में संलिप्तता के कारण
  • दुराचरण या अक्षमता के मामले में राष्ट्रपति इस विषय को उच्चतम न्यायालय में जांच के लिए सौंपता है

-सेवा शर्तें, वेतन भत्ते राज्य सरकार बनाएगी

– राज्य मानवाधिकार आयोग का सचिव राज्य सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी होगा

मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग :

स्थापना : 13 सितम्बर 1995

मुख्यालय : भोपाल

प्रथम अध्यक्ष : 

वर्तमान अध्यक्ष : मनोहर ममतानी

टैग लाइन :  हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार

मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 : 

कुल अध्याय : 8
कुल धाराएं : 43

अध्याय 2( धारा 3 से 11) : आयोग का गठन
अध्याय 3( धारा 12 से 16) : आयोग के कार्य
अध्याय 4( धारा 17 से 20) : आयोग की प्रक्रिया
धारा 3 :NHRC का गठन
धारा 4 : नियुक्ति
धारा 5 : त्यागपत्र व हटाया जाना
धारा 6 : पदावधी
धारा 7 : सदस्य का अध्यक्ष के रूप में कार्य करना
धारा 8 : सेवा शर्तें
धारा 9 : रिक्तियां
धारा 10 : प्रक्रिया का आयोग द्वारा विनियमित किया जाना
धारा 11 : आयोग के अधिकारी तथा अन्य कर्मचारी

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